Knews Desk– आइची-नागोया में जारी एशियन गेम्स के 13वें दिन भारत के लिए आर्चरी से बड़ी खुशखबरी आई। भारतीय महिला टीम ने पहली बार एशियन गेम्स के महिला रिकर्व टीम इवेंट के फाइनल में जगह बनाई और फाइनल में पहुंचने के बाद गोल्ड मेडल भी जीत लिया। इससे पहले इस इवेंट में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2010 में आया था, जब भारतीय टीम ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था।
भारतीय टीम ने फाइनल से पहले सेमीफाइनल में चीन का सामना किया। यहां टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चीन को एकतरफा अंदाज में 5-1 से हराया और फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल में भारत के सामने दक्षिण कोरिया की मजबूत टीम थी, जिसने पिछले लगातार 7 एशियन गेम्स में महिला रिकर्व टीम इवेंट का गोल्ड मेडल जीता था। दक्षिण कोरिया इस इवेंट में कुल 10 बार चैंपियन रह चुका है।फाइनल की शुरुआत बेहद रोमांचक रही। पहले दो सेट में दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली और दोनों सेट के बाद स्कोर 1-1 से बराबर था। इसके बाद तीसरे सेट में भारतीय टीम ने शानदार वापसी की। भारत ने तीसरा सेट 55-51 से अपने नाम किया और मुकाबले में 4-2 की बढ़त हासिल कर ली।अब भारतीय टीम को गोल्ड मेडल जीतने के लिए आखिरी सेट में केवल 1 पॉइंट की जरूरत थी। आखिरी सेट भी बेहद रोमांचक रहा और दोनों टीमों ने 54-54 अंक हासिल किए। इस तरह भारत ने मुकाबला 5-3 से जीत लिया और महिला रिकर्व टीम इवेंट में गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।
यह जीत भारतीय आर्चरी के लिए इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि एशियन गेम्स के इतिहास में यह भारत का आर्चरी में किसी भी स्तर पर पहला गोल्ड मेडल है। इससे पहले भारत ने रिकर्व में पुरुषों की कैटेगरी में 2 सिल्वर मेडल जीते थे। महिला टीम पहली बार फाइनल में पहुंची और पहली ही बार में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया।अंकिता भकाट के लिए यह उपलब्धि और भी खास है। वह 2022 एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थीं। अब उन्होंने कुमकुम मोहोद और कीर्ति के साथ मिलकर भारत को ऐतिहासिक गोल्ड दिलाया है।दक्षिण कोरिया के लिए यह हार लंबे समय बाद आई है। महिला रिकर्व टीम इवेंट में एशियन गेम्स में उसे आखिरी बार 1994 में हार मिली थी। इसके बाद 1998 से 2022 तक दक्षिण कोरिया लगातार गोल्ड मेडल जीतता रहा। ऐसे में भारतीय महिला टीम की यह जीत एशियन गेम्स में आर्चरी के इतिहास की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गई है। साथ ही इस प्रदर्शन ने 2028 ओलंपिक गेम्स के लिए भारतीय तीरंदाजों से उम्मीदें भी बढ़ा दी हैं।