उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, देश से लेकर प्रदेश की सड़को पर आज कल राजनीति में बवाल मचा है उत्तराखंड कांग्रेस पार्टी के प्रदर्शन में शामिल हुई उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने सरकार पर वोट चोरी के साथ-साथ इलेक्शन चोरी किए जाने का आरोप भी लगाया.कांग्रेस ने तत्काल प्रभाव से चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने की मांग करते हुए.बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्तोओ के साथ सचिवालय का घेराव तक किया विपक्ष का मनाना है की सरकार की विरोधी नीतियों के खिलाफ सड़कों से लेकर सदन तक संघर्ष करते रहेगे.साथ ही प्रदेश में एस आई आर को लेकर चौकाने वाला मामला सामने आया है.जिस पर विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष भी हैरान और परेशान नजर आ रहा है.आपको बता दे,उत्तराखंड में एस आई आर के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद 95 हजार से ज्यादा मतदाताओं के नाम ‘इनएलिजिबल’ मार्क किए जाने पर विवाद शुरू हो गया है। 14 जुलाई को ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद करीब 1 लाख 73 हजार फार्म-7 सामने आए हैं। इनमें 95 हजार से ज्यादा मामले ऐसे हैं,जिनमें सुनवाई के बाद मतदाताओं को ‘इनएलिजिबल’ मार्क किया गया। कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया और आपत्तियों के आधार पर नाम हटाने पर सवाल उठाए हैं। निर्वाचन कार्यालय का कहना है कि संबंधित मतदाताओं को नोटिस देकर सुनवाई के पर्याप्त मौके दिए गए थे। वहीं भाजपा ने भी आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अब 3 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी।लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मतदातों की सख्या का बदलाव चुनाव से पहले अगर सूची में अंकित होता है तो इसका खामयाजा निश्चित ही राजनैतिक दलों को चुनाव में उठाना पड़ सकता है.
केंद्रीय चुनाव आयोग में मतभेद की खबरों के बीच राजनीतिक तूफान भी मच गया है. विपक्षी पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा मांगा है.जिस पर विपक्ष का सड़को पर विरोध जारी है.इसी बीच प्रदेश में एसआईआर में 95 हजार से ज्यादा मतदाताओं के ‘इनएलिजिबल’ मार्क होने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे है।कांग्रेस का आरोप है, कि हरिद्वार, नैनीताल और उधम सिंह नगर की कई विधानसभाओं में बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज कराई गईं और इनमें मशीन से तैयार आपत्तियों का इस्तेमाल हुआ।विपक्ष का दावा है, कि एक ही व्यक्ति के माध्यम से हजारों मतदाताओं के नामों पर आपत्तियां दर्ज कराई गईं। कांग्रेस का सवाल है कि किसी मतदाता के पते पर नहीं रहने या डबल एंट्री होने की जानकारी आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति को कैसे हुई।जिसका आयोग को करीब 10 हजार लोगों का डेटा भी दिया है।सहायक निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास के मुताबिक एसआईआर के दौरान जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगति मिली या जिनकी मैपिंग नहीं हो सकी, उन्हें नोटिस जारी किए गए।इस मामले में भाजपा विधायक विनोद चमोली ने भी एसआईआर की प्रक्रिया में आई आपत्तियों के निस्तारण को महत्वपूर्ण बताया है।जिस पर एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े होने शुरू हो गए है.
बीते दिन पहले ही सरकार के खिलाफ वोट चोरी का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया.अब प्रदेश में भी एसआईआर को लेकर बड़ी संख्या में लोगों के नामों पर आपत्तियां आई हैं, इसलिए यह देखना जरूरी है, कि इनका निस्तारण किस तरह होगा।जानकारों के मुताबिक राज्य के नागरिकों को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए और अंतिम मतदाता सूची में पात्र लोगों के नाम होने चाहिए।हलाकि अभी अंतिम सूची का प्रकाशन होना बाकी है, इसलिए 3 अक्टूबर के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। तभी अंतिम सूची के बाद नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू होगी और पात्र लोगों के लिए रास्ता खुला रहेगा।लेकिन सवाल अब यही उठता है.की अब तक की निर्वाचन जानकारी के अनुसार अगर करीब 24 लाख 30 हजार मतदाताओं को नोटिस दिए गए और संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने के दो-तीन मौके मिले हे। जो लोग सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए या जरूरी दस्तावेज नहीं दे सके, उन्हें ईआरओ या एईआरओ ने ‘इनएलिजिबल’ मार्क किया।यहीं वजह है की एस आई आर के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद 95 हजार से ज्यादा मतदाताओं के नाम ‘इनएलिजिबल’ मार्क किए जा चुके है.अगर जल्द सका समाधान सही से नहीं हुआ तो निश्चित ही इसका चुनाव में बड़ा खामियाजा राजनैतिक दलों को भुगतना पड़ सकता है.