मछली बेचने से एशियन गेम्स तक… मनीषा ने नीरू-आशिमा संग भारत को दिलाया सिल्वर

Knews Desk– भारत की ओर से इस टीम इवेंट में नीरू ढांढा का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा। उन्होंने अकेले 118 अंक स्कोर किए और संयुक्त रूप से पहले स्थान पर रहीं। अपने इस प्रदर्शन के दम पर नीरू ने महिलाओं की ट्रैप शूटिंग के इंडिविजुअल इवेंट के फाइनल में भी जगह बनाई। वहीं आशिमा अहलावत ने 106 अंक और मनीषा कीर ने 104 अंक हासिल किए। दोनों खिलाड़ी अपने स्कोर के साथ इंडिविजुअल फाइनल के लिए क्वालिफाई करने वाली टॉप-8 शूटर्स में जगह नहीं बना सकीं, लेकिन टीम इवेंट में उनके प्रदर्शन ने भारत को सिल्वर मेडल दिलाने में अहम योगदान दिया।भारतीय महिला शूटिंग टीम की इस सफलता में तीनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन का योगदान रहा। नीरू ने 118 अंक, आशिमा ने 106 अंक और मनीषा ने 104 अंक हासिल किए, जिससे भारत का कुल स्कोर 328 तक पहुंचा। हालांकि चीन की टीम ने 346 अंक के साथ गोल्ड मेडल जीता, लेकिन भारतीय तिकड़ी ने सिल्वर मेडल अपने नाम कर देश के पदक अभियान में एक और उपलब्धि जोड़ दी।

इन तीनों खिलाड़ियों की पृष्ठभूमि भी अलग-अलग रही है। नीरू ढांढा किसान की बेटी हैं, जबकि आशिमा अहलावत को ट्रैप शूटिंग के मंच तक पहुंचाने में उनकी मां के बलिदानों का बड़ा योगदान रहा है। वहीं मनीषा कीर की कहानी संघर्ष और मेहनत से भरी हुई है। मनीषा भोपाल के एक मछुआरे की बेटी हैं और एक समय अपने 10 सदस्यीय परिवार का पेट पालने के लिए उन्हें अपने पिता का हाथ बंटाना पड़ता था।मनीषा अपने पिता के साथ मछली पकड़ने और उसे बेचने का काम करती थीं। इसके बावजूद उन्होंने शूटिंग में अपना रास्ता बनाया और आज एशियन गेम्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा बनीं। मनीषा को शूटिंग से परिचित कराने में उनकी बड़ी बहन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी बड़ी बहन उन्हें उस ट्रायल तक लेकर गईं, जहां भारत के पूर्व ओलंपियन शूटर मनशेर सिंह की नजर मनीषा की प्रतिभा पर पड़ी।

इसके बाद मनीषा ने शूटिंग में अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार मेहनत की और आगे बढ़ती गईं। जिस लड़की को कभी परिवार की मदद के लिए पिता के साथ मछली पकड़ने और बेचने का काम करना पड़ता था, उसने अब एशियन गेम्स में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतकर अपनी मेहनत और संघर्ष को बड़ी उपलब्धि में बदल दिया है।एशियन गेम्स 2026 में मनीषा कीर, नीरू ढांढा और आशिमा अहलावत की तिकड़ी का यह सिल्वर मेडल भारतीय शूटिंग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। तीनों ने मिलकर 328 का स्कोर किया और भारत को पोडियम पर जगह दिलाई। खास तौर पर मनीषा की कहानी बताती है कि सीमित परिस्थितियों के बावजूद प्रतिभा, मेहनत और सही अवसर के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा जा सकता है। जापान के आइची नगोया में भारत के लिए शूटिंग में आया यह सिल्वर मेडल देश के पदक अभियान में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ गया।

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