KNEWS DESK- UPI ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर मोबाइल रिटेलर्स ने विरोध का ऐलान किया है। इंडस्ट्री बॉडी ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) ने 2 अक्टूबर 2026 को ‘नो UPI डे’ मनाने का आह्वान किया है। संगठन का कहना है कि UPI पर MDR लागू होने से छोटे मोबाइल दुकानदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
AIMRA के वाइस प्रेसिडेंट और दिल्ली-NCR के अध्यक्ष तरविंदर सिंह के मुताबिक, 2 अक्टूबर को देशभर के मोबाइल रिटेलर्स UPI पेमेंट स्वीकार नहीं करने का विरोध जताएंगे। इसके तहत दुकानदार अपने प्रतिष्ठानों पर लगे UPI QR कोड को काले कपड़े से ढकने की योजना बना रहे हैं। संगठन का उद्देश्य UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लगाए जाने वाले 0.4 फीसदी MDR को लेकर अपनी चिंताओं को सामने रखना है।
AIMRA का दावा है कि जिन छोटे रिटेलर्स का UPI के जरिए हर महीने 5 लाख से 30 लाख रुपये तक का कारोबार होता है, उन्हें 0.4 फीसदी MDR के कारण करीब 2,000 से 12,000 रुपये तक का अतिरिक्त मासिक खर्च उठाना पड़ सकता है। संगठन के अनुसार, इससे छोटे दुकानदारों की आय पर सीधा असर पड़ेगा।
मोबाइल रिटेलर्स संगठन का अनुमान है कि 0.4 फीसदी MDR के चलते देशभर के छोटे मोबाइल कारोबारियों पर हर महीने करीब 40 करोड़ रुपये और सालाना लगभग 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
AIMRA का कहना है कि उसका विरोध UPI या डिजिटल पेमेंट व्यवस्था के खिलाफ नहीं है। संगठन डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने का समर्थन करता है, लेकिन उसकी मांग है कि UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR शून्य रखा जाए।
AIMRA के मुताबिक, अगर देश में डिजिटल इंडिया को आगे बढ़ाना है तो डिजिटल भुगतान को कारोबारियों के लिए किफायती बनाए रखना जरूरी है। संगठन ने सरकार से UPI मर्चेंट पेमेंट को जीरो MDR व्यवस्था के तहत जारी रखने की मांग की है।