रमीकल्चर और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने PMLA के तहत कार्रवाई की है। एजेंसी ने 442.35 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अटैच की हैं। जांच में BOT के इस्तेमाल, यूजर्स को आकर्षित करने वाले ऑफर और कथित अपराध से अर्जित रकम को अलग-अलग निवेश माध्यमों में लगाने की बात सामने आई है।
Knews Desk– ऑनलाइन रमी गेमिंग ऐप रमीकल्चर और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने PMLA के तहत करीब 442.35 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अटैच की हैं। यह कार्रवाई 25 सितंबर 2026 को जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत की गई।
ED के अनुसार, अटैच की गई संपत्तियों में फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा रकम, कमर्शियल दुकानें, एक विला और कई रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि ये संपत्तियां Gameskraft Technologies Pvt. Ltd. के शेयरहोल्डर्स के परिवार के सदस्यों, प्राइवेट फैमिली ट्रस्ट और उनसे जुड़ी विभिन्न कंपनियों के नाम पर हैं।
जांच एजेंसी के मुताबिक Gameskraft Technologies और RummyTime Technologies मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन रियल मनी गेम्स संचालित करती थीं। इनमें RummyCulture, RummyPrime, Playship और RummyTime जैसे ब्रांड शामिल थे। ED का दावा है कि इन प्लेटफॉर्म से देशभर में करीब 3 करोड़ यूजर्स जुड़े हुए थे।
ED ने बताया कि नेटवर्क में बड़ी संख्या में ऐसे यूजर्स भी शामिल थे, जो तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में थे, जहां ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग पर रोक थी। कंपनियां यूजर्स की ओर से लगाए गए दांव की रकम पर करीब 10 से 15 फीसदी प्लेटफॉर्म कमीशन लेती थीं।
जांच के दौरान ED ने आरोप लगाया कि गेमिंग प्लेटफॉर्म को यूजर्स के सामने पारदर्शी और निष्पक्ष बताया गया, लेकिन पर्दे के पीछे BOT यानी ऑटोमेटेड प्रोग्राम और एल्गोरिदम का इस्तेमाल किया जाता था। एजेंसी के अनुसार, यूजर्स को कथित तौर पर इसकी जानकारी नहीं थी। ED का आरोप है कि BOT के इस्तेमाल से कई खिलाड़ियों को आर्थिक नुकसान हुआ और कंपनियों को अपराध से अर्जित आय हासिल हुई।
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि नए यूजर्स को प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए कंपनियों ने करीब 1,035 करोड़ रुपये मार्केटिंग और प्रमोशन पर खर्च किए। बोनस, रेफरल इंसेंटिव, फ्री टूर्नामेंट और अन्य ऑफर के जरिए यूजर्स को ज्यादा गेम खेलने और रकम जमा करने के लिए आकर्षित किया गया। ED के मुताबिक, कुछ मामलों में पैसे निकालने पर 5 से 10 फीसदी तक चार्ज भी लगाया गया।
एजेंसी के अनुसार, Super Booster जैसे ऑफर के जरिए यूजर्स को निकाली जा सकने वाली रकम को दोबारा Game Cash में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया गया। जांच में यह भी आरोप है कि भारी नुकसान के बाद गेम खेलना छोड़ चुके यूजर्स से कैश क्रेडिट, प्रमोशनल ऑफर, SMS, नोटिफिकेशन और टेलीमार्केटिंग कॉल के जरिए दोबारा गेम खेलने के लिए संपर्क किया गया।
ED के मुताबिक, जांच में यह भी पता चला कि कथित अपराध से अर्जित आय को डिविडेंड और शेयर बाय-बैक के माध्यम से शेयरहोल्डर्स तक पहुंचाया गया। इसके बाद इस रकम को म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, कन्वर्टिबल नोट्स, इक्विटी शेयर, दूसरी चल संपत्तियों और महंगी अचल संपत्तियों में निवेश किया गया। इनमें फैमिली ट्रस्ट और संबंधित कंपनियों के माध्यम से रखी गई संपत्तियां भी शामिल थीं।
ED इससे पहले तलाशी के दौरान करीब 495 करोड़ रुपये की चल संपत्तियां फ्रीज कर चुका है। इसके अलावा करीब 11 लाख रुपये नकद और लगभग 2.30 किलो सोना-हीरा समेत ज्वेलरी और बुलियन भी जब्त किए गए थे। एजेंसी ने इससे पहले करीब 1,906 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की थीं।
ED के अनुसार, अब तक इस मामले की जांच के दौरान कुल करीब 2,843 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय से जुड़ी संपत्तियां अटैच, फ्रीज या जब्त की जा चुकी हैं। मामले में एजेंसी की जांच अभी जारी है।