बीएल संतोष से CM योगी तक… BJP कार्यकर्ताओं को बार-बार क्यों दिया जा रहा संगठन मजबूत करने का संदेश?

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा ने संगठन को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बीएल संतोष, विनोद तावड़े, नितिन नबीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचकर संगठन मजबूत करने, बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने और गिले-शिकवे पीछे छोड़कर चुनावी तैयारी में जुटने का संदेश दे रहे हैं।

Knews Desk- उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व लगातार अलग-अलग इलाकों में बैठकें कर रहा है। राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष से लेकर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन तक कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मेरठ में कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचे और उन्हें राष्ट्र प्रथम के साथ संगठन को मजबूत करने का संदेश दिया।

21 सितंबर को मेरठ में भाजपा के शक्ति केंद्र संयोजकों के सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्हें यह नहीं सोचना चाहिए कि पार्टी ने उन्हें क्या दिया, बल्कि यह विचार करना चाहिए कि वे देश के लिए क्या कर रहे हैं। योगी ने व्यक्ति से ऊपर दल और दल से ऊपर राष्ट्र को रखने की बात कही।

इससे पहले लखनऊ में भाजपा की संगठनात्मक बैठकों के दौरान बीएल संतोष ने कार्यकर्ताओं से पार्टी की कमजोरियों को लेकर खुलकर प्रतिक्रिया मांगी थी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से छोटे-मोटे मामलों और विवादों को लेकर थाने और चौकियों के चक्कर लगाने के बजाय अपनी ऊर्जा संगठन को मजबूत करने में लगाने को कहा था।

लखनऊ में हुई संघ-भाजपा समन्वय बैठक में भी कार्यकर्ताओं और संघ के कार्यकर्ताओं की ओर से थाने, तहसील और ब्लॉक स्तर पर सुनवाई नहीं होने जैसी शिकायतों का मुद्दा सामने आया। संगठन और सरकार के बीच तालमेल के साथ-साथ जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता को लेकर भी चर्चा हुई।

भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े भी पिछले दिनों लगातार अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। गोरखपुर में उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और जनता के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से चुनावी तैयारियों में जुटने और लगातार लोगों के बीच रहने को कहा।

दरअसल, चुनावी तैयारियों में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। बूथ पर काम करने वाला कार्यकर्ता, मंडल पदाधिकारी, शक्ति केंद्र संयोजक और स्थानीय नेता ही पार्टी की चुनावी मशीनरी को जमीन पर सक्रिय रखते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन के बाद भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अपने संगठनात्मक ढांचे और जमीनी स्थिति की समीक्षा शुरू की थी। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी संगठन से जुड़ी किसी भी कमजोरी को दूर करने पर जोर दे रही है।

इसी के तहत बूथ स्तर से रिपोर्ट जुटाई जा रही है कि कौन कार्यकर्ता सक्रिय है, कहां संगठन कमजोर है, किन इलाकों में स्थानीय नेताओं के बीच समन्वय की कमी है और कहां कार्यकर्ताओं को दोबारा सक्रिय करने की जरूरत है। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि जनता की शिकायतें संगठन तक किस तरह पहुंच रही हैं।

भाजपा-संघ की लखनऊ बैठक में थाने, तहसील और ब्लॉक स्तर पर सुनवाई नहीं होने की शिकायतों का सामने आना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसी कार्यकर्ता को यदि अपने क्षेत्र की समस्या को लेकर अधिकारियों के स्तर पर सुनवाई नहीं मिलती है, तो यह मामला व्यक्तिगत शिकायत से आगे बढ़कर संगठन के भीतर असंतोष का विषय बन सकता है।

भाजपा की चुनावी रणनीति में बूथ संगठन को लंबे समय से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। यही वजह है कि नितिन नबीन से लेकर विनोद तावड़े तक बूथ स्तर की तैयारियों पर जोर दे रहे हैं। नबीन के पश्चिमी यूपी दौरे के दौरान बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल और जिला स्तर की तैयारियों की समीक्षा की गई। वहीं तावड़े ने भी बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और जनता से संपर्क बढ़ाने को चुनावी तैयारी का आधार बताया।

2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन भाजपा के लगातार हो रहे दौरे और बैठकों से संकेत मिलता है कि पार्टी चुनावी मुद्दों के साथ-साथ अपने संगठन की अंदरूनी स्थिति पर भी ध्यान दे रही है। बीएल संतोष कार्यकर्ताओं से संगठन की कमजोरियों और समस्याओं पर प्रतिक्रिया ले रहे हैं। विनोद तावड़े बूथ मजबूत करने और जनता के बीच लगातार संपर्क बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं। संघ-भाजपा की समन्वय बैठकों में संगठन और सरकार के बीच तालमेल की समीक्षा हो रही है।

वहीं नितिन नबीन अलग-अलग क्षेत्रों में संगठन की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार्यकर्ताओं को पार्टी से अपेक्षाओं के बजाय देश के लिए योगदान पर ध्यान देने का संदेश दे रहे हैं।

यानी बीएल संतोष से लेकर योगी आदित्यनाथ तक भाजपा नेतृत्व की बैठकों में अलग-अलग शब्दों में एक ही बात सामने आ रही है—गिले-शिकवे पीछे छोड़कर संगठन को मजबूत करना, बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाना और 2027 के चुनाव के लिए पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरना।

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