उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। बीजेपी ने संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ अपने सहयोगी दलों और उन नेताओं के साथ भी संवाद बढ़ाना शुरू कर दिया है, जिनको लेकर हाल के दिनों में राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं।
Knews Desk- शनिवार को बीजेपी की सक्रियता की दो तस्वीरें सामने आईं। एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रायबरेली सदर की बीजेपी विधायक अदिति सिंह से मुलाकात की, वहीं दूसरी ओर पार्टी के प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े गोरखपुर में निषाद पार्टी के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री संजय निषाद से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे। दोनों मुलाकातों का संदर्भ अलग है, लेकिन इन घटनाक्रमों से बीजेपी और उसके सहयोगियों के बीच संवाद और समन्वय पर बढ़ते जोर की तस्वीर सामने आती है।
संजय निषाद की तावड़े से मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि निषाद पार्टी लंबे समय से निषाद समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाती रही है। आरक्षण समेत कई मांगों को लेकर संजय निषाद सरकार और बीजेपी नेतृत्व के सामने अपनी बात रखते रहे हैं। मुलाकात के दौरान निषाद आरक्षण, आंदोलन से जुड़े मामलों की वापसी, मजवार और तुरहा समुदाय की परिभाषा तथा पार्टी कार्यकर्ताओं को विभिन्न आयोगों में प्रतिनिधित्व देने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
संजय निषाद ने आरक्षण के मुद्दे पर सामाजिक न्याय मंत्रालय के स्तर पर पहल किए जाने की मांग भी रखी। इससे संकेत मिलता है कि बातचीत सिर्फ आगामी चुनाव की तैयारियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि समुदाय से जुड़े लंबित मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहे।
गोंडा में विनोद साहनी हत्याकांड के बाद निषाद समाज को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं। संजय निषाद ने इस मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई थी। इसके बाद विपक्षी दलों ने भी निषाद समुदाय के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाई। ऐसे माहौल में बीजेपी के प्रदेश प्रभारी का संजय निषाद के कार्यालय जाकर मुलाकात करना गठबंधन के भीतर संवाद बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
विनोद तावड़े का गोरखपुर दौरा भी संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। बीजेपी 2027 चुनाव से पहले अलग-अलग क्षेत्रों में संगठन की स्थिति, कार्यकर्ताओं की राय और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों का फीडबैक जुटा रही है। गोरखपुर के बाद अवध और काशी क्षेत्र में भी पार्टी की बैठकें प्रस्तावित हैं। ऐसे में संगठनात्मक कार्यक्रमों के बीच संजय निषाद से मुलाकात को भी व्यापक राजनीतिक संवाद के संदर्भ में देखा जा रहा है।
दूसरी तरफ रायबरेली सदर से बीजेपी विधायक अदिति सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई जब उनके कांग्रेस में लौटने की अटकलें राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई थीं। हालांकि मुलाकात के बाद अदिति सिंह ने इसे शिष्टाचार भेंट बताते हुए रायबरेली के विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों पर मुख्यमंत्री से चर्चा की जानकारी दी।
अदिति सिंह और योगी आदित्यनाथ की मुलाकात की तस्वीर सामने आने के बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर चल रही चर्चाओं को भी नई दिशा मिली। हालांकि इस मुलाकात को लेकर बीजेपी की ओर से किसी विशेष राजनीतिक रणनीति की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
2027 के चुनाव से पहले बीजेपी के सामने संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ सहयोगी दलों और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच तालमेल बनाए रखने की चुनौती भी है। पूर्वांचल की राजनीति में निषाद समुदाय की भूमिका को देखते हुए निषाद पार्टी के साथ संवाद पार्टी की चुनावी तैयारियों का एक अहम हिस्सा हो सकता है।
वहीं रायबरेली जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में अदिति सिंह की भूमिका को लेकर भी लगातार चर्चा होती रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री के साथ उनकी मुलाकात का सार्वजनिक होना राजनीतिक तौर पर चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है।
इन दोनों घटनाक्रमों को एक साथ देखें तो इतना जरूर कहा जा सकता है कि बीजेपी 2027 के चुनाव से पहले अपने संगठन, सहयोगियों और प्रमुख नेताओं के साथ संवाद को प्राथमिकता दे रही है। हालांकि इन मुलाकातों को सीधे किसी बड़े राजनीतिक बदलाव या डैमेज कंट्रोल के तौर पर देखना फिलहाल बीजेपी की ओर से आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं है।