KNEWS DESK- नई कार खरीदने के बाद उसे अपने हिसाब से कस्टमाइज करना कई लोगों को पसंद होता है। कोई गाड़ी में नया म्यूजिक सिस्टम लगवाता है, तो कोई एलईडी लाइट्स, अलॉय व्हील्स या दूसरे एक्सेसरीज लगवाकर उसका लुक बदलना चाहता है। हालांकि, कार में किसी भी तरह का बदलाव कराने से पहले यह समझना जरूरी है कि उसका असर वारंटी और भविष्य के क्लेम पर पड़ सकता है या नहीं।
कार की वारंटी आमतौर पर मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट और कुछ तय तकनीकी खराबियों को कवर करती है। इसकी अवधि और शर्तें कंपनी, मॉडल और वारंटी पैकेज के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। अगर बाहर से लगवाया गया कोई पार्ट कार के ओरिजिनल हिस्से को नुकसान पहुंचाता है, तो उस खराबी का वारंटी क्लेम स्वीकार करने से कंपनी मना कर सकती है।
इंजन में बदलाव पड़ सकता है भारी
कुछ कार मालिक गाड़ी की स्पीड या परफॉर्मेंस बढ़ाने के लिए इंजन और उससे जुड़े सिस्टम में बदलाव करवाते हैं। इंजन ट्यूनिंग, पावर बढ़ाने वाले पार्ट्स या एग्जॉस्ट सिस्टम में बदलाव से कार के काम करने का तरीका बदल सकता है। अगर इस तरह के मॉडिफिकेशन से इंजन, ट्रांसमिशन या दूसरे संबंधित पार्ट्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और उनमें खराबी आती है, तो कंपनी वारंटी के तहत मरम्मत का खर्च उठाने से इनकार कर सकती है। इसलिए इंजन से जुड़ा कोई भी बदलाव कराने से पहले कंपनी की लिखित शर्तों को समझना जरूरी है।
म्यूजिक सिस्टम लगवाते समय रखें सावधानी
कार में नया म्यूजिक सिस्टम, एम्प्लीफायर या अतिरिक्त स्पीकर लगवाना आम मॉडिफिकेशन में शामिल है। लेकिन इनकी वायरिंग गलत तरीके से होने पर कार के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में परेशानी आ सकती है। गलत वायरिंग से फ्यूज उड़ने, बैटरी पर अतिरिक्त लोड पड़ने या इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट से जुड़ी समस्या होने का खतरा हो सकता है। अगर जांच में यह सामने आता है कि खराबी बाहरी सिस्टम लगाने के कारण हुई है, तो संबंधित पार्ट का वारंटी क्लेम प्रभावित हो सकता है।
नई लाइट्स और एक्सेसरीज से जुड़ी सावधानियां
कार में एलईडी हेडलाइट्स, अतिरिक्त लाइट्स या अन्य इलेक्ट्रिकल एक्सेसरीज लगवाने से पहले यह देखना चाहिए कि वे कार के इलेक्ट्रिकल सिस्टम के अनुकूल हैं या नहीं। खराब क्वालिटी के पार्ट्स या गलत इंस्टॉलेशन से वायरिंग और बैटरी पर असर पड़ सकता है। इसी तरह, ऐसे एक्सेसरीज से बचना चाहिए जिनसे कार की सुरक्षा, ब्रेकिंग या ड्राइविंग सिस्टम में बदलाव हो। किसी भी पार्ट को लगवाने से पहले उसकी गुणवत्ता और इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया पर ध्यान देना जरूरी है।
क्या मॉडिफिकेशन से पूरी वारंटी खत्म हो जाती है?
कार में कोई भी बाहरी पार्ट लगवाने से पूरी वारंटी अपने आप खत्म नहीं होती। आमतौर पर यह देखा जाता है कि मॉडिफिकेशन और खराबी के बीच कोई संबंध है या नहीं। उदाहरण के लिए, अगर कार में बाहर से लगवाए गए म्यूजिक सिस्टम की गलत वायरिंग से इलेक्ट्रिकल समस्या आती है, तो कंपनी उस समस्या से जुड़े क्लेम को अस्वीकार कर सकती है। लेकिन इससे जरूरी नहीं कि इंजन या किसी दूसरे असंबंधित पार्ट की वारंटी भी खत्म हो जाए। हालांकि, अलग-अलग कंपनियों की वारंटी पॉलिसी में शर्तें अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अपनी कार की वारंटी बुकलेट और कंपनी की शर्तें देखना जरूरी है।
मॉडिफिकेशन से पहले इन बातों का रखें ध्यान
कार में बाहर से कोई पार्ट लगवाने से पहले अधिकृत सर्विस सेंटर से जानकारी लें। उनसे पूछें कि संबंधित एक्सेसरी लगाने से वारंटी पर क्या असर पड़ेगा और क्या कंपनी इसकी अनुमति देती है। इसके अलावा, इंस्टॉलेशन के लिए भरोसेमंद तकनीशियन चुनें और पार्ट की गुणवत्ता पर समझौता न करें। अगर कंपनी से वारंटी संबंधी कोई जानकारी मिलती है, तो उसे लिखित रूप में लेना उपयोगी हो सकता है।
कार को स्टाइलिश बनाने के लिए मॉडिफिकेशन कराना गलत नहीं है, लेकिन ऐसा बदलाव जो सुरक्षा या कार के मूल सिस्टम को प्रभावित करे, आगे चलकर अतिरिक्त खर्च और परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए पार्ट्स लगवाने से पहले उनकी गुणवत्ता, इंस्टॉलेशन और वारंटी की शर्तों को समझना जरूरी है।