राम जन्मभूमि फैसले से शर्मिंदा थीं स्वरा भास्कर, बोलीं- सलमान से आमिर तक सभी को मैसेज कर मांगी माफी

Knews Desk – एक्ट्रेस स्वरा भास्कर एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर साल 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देती नजर आ रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस छिड़ गई है।

वायरल वीडियो में स्वरा भास्कर कहती हैं कि जब अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था, तब वह काफी परेशान और निराश थीं। उन्हें यह फैसला सही नहीं लगा था। वह बताती हैं कि एक हिंदू होने के नाते उन्होंने अपने फोनबुक में मौजूद मुस्लिम दोस्तों को मैसेज करके अपनी भावनाएं साझा की थीं।

आमिर, शाहरुख और सलमान का भी किया जिक्र

वीडियो में स्वरा भास्कर ने बताया कि उन्होंने अपने मुस्लिम दोस्तों को मैसेज किया था। इनमें आमिर खान, शाहरुख खान, सलमान खान और फहाद अहमद जैसे नामों का जिक्र किया गया। उन्होंने कहा कि वह इस फैसले से सहमत नहीं थीं और उन्हें इस बात का खेद था। उन्होंने खुद को शर्मिंदा महसूस करने की बात भी कही।

हालांकि, वायरल वीडियो के संदर्भ और इसकी रिकॉर्डिंग की तारीख की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

स्वरा भास्कर के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर इस तरह की टिप्पणी न्यायपालिका के प्रति असम्मान है। वहीं, दूसरे पक्ष का तर्क है कि लोकतंत्र में नागरिकों को अदालत के फैसलों पर अपनी व्यक्तिगत राय रखने और असहमति जताने का अधिकार है।

2019 में क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को फैसला सुनाया था। पांच जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला विराजमान को देने का आदेश दिया था। साथ ही सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में मस्जिद के निर्माण के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का निर्देश दिया गया था।

अदालत ने अपने फैसले में 1949 में विवादित ढांचे के भीतर मूर्तियां रखे जाने और 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने को कानून का उल्लंघन बताया था। वहीं, विवादित जमीन पर रामलला के अधिकार को स्वीकार किया था।

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