KNEWS DESK- ओडिशा के बालासोर जिले के जंगलों से रेस्क्यू किए गए पांच नन्हे ओरंगुटान अब भुवनेश्वर के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में हैं। इनके लिए पार्क में विशेष तापमान नियंत्रित क्वारंटाइन सेंटर तैयार किया गया है, जहां तीन केयरटेकर और पशु चिकित्सकों की टीम चौबीसों घंटे उनकी निगरानी कर रही है।
स्वास्थ्य जांच में पांचों ओरंगुटान में तीन नर और दो मादा पाए गए। इनमें से एक को तेज बुखार था, जिसके बाद डॉक्टरों की सलाह पर उसे जरूरी दवाएं दी गईं। फिलहाल सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है। सुरक्षा के लिए पूरे क्वारंटाइन सेंटर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। नन्हे ओरंगुटान की देखभाल के लिए मैसूर जू से भी सलाह ली जा रही है। दो बेहद छोटे शिशुओं को मैश किया हुआ आलू, उबला सेब और पोषणयुक्त दूध दिया जा रहा है, जबकि बाकी तीन को केला और सेब खिलाया जा रहा है। सभी को हर दो घंटे में भोजन कराया जा रहा है, ताकि उन्हें पर्याप्त पोषण और ऊर्जा मिल सके।
मानसिक तनाव कम करने और उन्हें नए माहौल में सहज बनाने के लिए क्वारंटाइन कक्ष में खिलौने भी रखे गए हैं। जू प्रशासन के मुताबिक फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता पांचों ओरंगुटान को पूरी तरह स्वस्थ और स्थिर करना है। भारत या ओडिशा के जंगलों में ओरंगुटान का मिलना बेहद असामान्य है, क्योंकि यह भारत की मूल प्रजाति नहीं है। ऐसे में पांच शिशु ओरंगुटान का बालासोर के जंगलों में मिलना वन्यजीव अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
आशंका है कि इनके पीछे किसी अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का हाथ हो सकता है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये ओरंगुटान भारत कैसे पहुंचे और इन्हें बालासोर के जंगल में किसने छोड़ा।