knews desk – केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को गोवा की राजधानी पणजी में पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की 28वीं बैठक की अध्यक्षता की. बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद में शामिल राज्यों के बीच अब कोई विवाद नहीं बचा है. उन्होंने इसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि क्षेत्रीय परिषदें अब विवादों के समाधान से आगे बढ़कर विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी का माध्यम बन रही हैं.
अमित शाह ने कहा कि क्षेत्रीय परिषदों के जरिए केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय मजबूत हुआ है. उन्होंने सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने में इन परिषदों की भूमिका को अहम बताया.
पहली तिमाही में 7.8 फीसदी रही विकास दर
गृहमंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है. उन्होंने कहा कि दुनियाभर में आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की यह रफ्तार गर्व की बात है.
उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र को देश की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण इंजन बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र का देश की विकास दर में बड़ा योगदान है. उनके मुताबिक पश्चिमी क्षेत्र भारत का प्रमुख आर्थिक, औद्योगिक और वित्तीय केंद्र है.
शाह ने W-E-S-T से समझाया पश्चिमी क्षेत्र का महत्व
अमित शाह ने पश्चिमी क्षेत्र को देश की आर्थिक वृद्धि का ‘वेस्ट इंजन’ बताया. उन्होंने W-E-S-T के जरिए इस क्षेत्र की ताकत को समझाया.
शाह के मुताबिक W का मतलब Wealth और Finance, E का मतलब Export और Ports, S का मतलब Startups और Semiconductors, जबकि T का मतलब Tourism और Blue Economy है. उन्होंने कहा कि इन सभी क्षेत्रों में पश्चिमी क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है.
उन्होंने दमन और दीव तथा दादरा एवं नगर हवेली सहित पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों के देश की आर्थिक वृद्धि में योगदान की भी सराहना की.
क्षेत्रीय परिषदों की बैठकों में हुआ बड़ा इजाफा
गृहमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने संविधान में निहित सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करने के लिए काम किया है. क्षेत्रीय परिषदों की बैठकें अब केवल विवादों के समाधान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विकास और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों की निगरानी भी इनका अहम हिस्सा बन गई है.
उन्होंने आंकड़े देते हुए बताया कि 2004 से 2014 के बीच क्षेत्रीय परिषदों और उनकी स्थायी समितियों की कुल 25 बैठकें हुई थीं. वहीं 2014 के बाद अब तक 71 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं. यानी बैठकों की संख्या में करीब तीन गुना बढ़ोतरी हुई है.
1,893 मुद्दों में से 1,445 का समाधान
अमित शाह ने बताया कि क्षेत्रीय परिषदों की बैठकों में कुल 1,893 मुद्दों पर चर्चा की गई, जिनमें से 1,445 मुद्दों का समाधान किया जा चुका है. उन्होंने इसे परिषदों की कार्यक्षमता और केंद्र-राज्य समन्वय का उदाहरण बताया.
शाह ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘टीम इंडिया’ विजन से जोड़ते हुए कहा कि राज्यों और केंद्र के मिलकर काम करने से विकास की गति को और तेज किया जा सकता है.
गृहमंत्री ने पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों से नई न्याय संहिताओं को प्रभावी तरीके से लागू करने की अपील की. इसके साथ ही उन्होंने नशे के खिलाफ चल रही लड़ाई में भी पश्चिमी क्षेत्र को अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया.
उन्होंने सभी राज्यों के अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों को CFCFRMS से जोड़ने पर भी जोर दिया, ताकि वित्तीय व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके.