Knews Desk – ऑस्ट्रेलिया सोशल मीडिया यूजर्स को जल्द ही अपनी फीड पर ज्यादा नियंत्रण देने की तैयारी कर रहा है। सरकार एक नया कानून लाने की योजना बना रही है, जिसके तहत यूजर्स को पर्सनलाइज्ड एल्गोरिदम बंद करने का विकल्प मिल सकता है। यानी यूजर खुद तय कर सकेंगे कि उनकी पसंद और ऑनलाइन गतिविधियों के आधार पर सोशल मीडिया उन्हें कंटेंट सुझाए या नहीं।प्रस्तावित कानून के तहत मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनियों को यूजर्स को ऐसा विकल्प देना पड़ सकता है, जिससे वे अपनी रुचि और ऑनलाइन व्यवहार का विश्लेषण करने वाले रिकमेंडेशन एल्गोरिदम को बंद कर सकें। सरकार का उद्देश्य यूजर्स को सोशल मीडिया फीड पर ज्यादा अधिकार देना है।
ऑस्ट्रेलिया की कम्युनिकेशंस मिनिस्टर अनिका वेल्स के मुताबिक, यूजर्स को यह तय करने का अधिकार मिलना चाहिए कि उनकी सोशल मीडिया फीड किस तरह काम करे। सरकार का कहना है कि कई लोग पर्सनलाइज्ड फीड पसंद करते हैं, लेकिन जिन लोगों को यह सुविधा नहीं चाहिए, उनके पास इसे बंद करने का विकल्प भी होना चाहिए।प्रस्तावित ड्राफ्ट में बड़ी टेक कंपनियों के लिए ‘डिजिटल ड्यूटी ऑफ केयर’ का प्रावधान भी शामिल किया जा सकता है। इसका मकसद प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स पर उनके एल्गोरिदम के प्रभाव को लेकर ज्यादा जिम्मेदार बनाना है।
ऑस्ट्रेलिया सोशल मीडिया को लेकर पहले भी कड़े कदम उठा चुका है। 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लागू किया जा चुका है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ बच्चे अब भी इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने के तरीके तलाश रहे हैं।सोशल मीडिया एल्गोरिदम यूजर के लाइक, शेयर, वीडियो देखने और ब्राउजिंग पैटर्न का विश्लेषण करके उसी तरह का कंटेंट बार-बार दिखाते हैं। इससे यूजर लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बने रह सकते हैं और कभी-कभी सनसनीखेज या अतिवादी कंटेंट भी तेजी से सामने आ सकता है। ऑस्ट्रेलिया का नया प्रस्ताव यूजर्स को इस प्रक्रिया से बाहर निकलने का विकल्प देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।