सत्य निकेतन PG हादसा: दरारों और कथित अवैध निर्माण के बीच कैसे ढह गई पांच मंजिला इमारत?
KNews Desk: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला PG इमारत ढहने से 6 छात्रों की मौत की खबर ने राजधानी में बिल्डिंग सेफ्टी और अवैध निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान चलाया गया, जिसमें 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। अब पुलिस और प्रशासन की जांच का फोकस इस बात पर है कि आखिर इमारत में ऐसी कौन-कौन सी खामियां थीं, जिनकी वजह से यह हादसा हुआ और क्या समय रहते खतरे को पहचाना जा सकता था।करीब 55 वर्ग गज क्षेत्र में बनी यह इमारत 1990 के दशक के आखिर में तैयार की गई थी। बाद में इसे बहुमंजिला PG के तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा। स्थानीय लोगों का दावा है कि इमारत में काफी समय से दरारें और नमी दिखाई दे रही थीं। इसके बावजूद यहां छात्रों के रहने की व्यवस्था जारी रही। हादसे के बाद अब इस बात की जांच की जा रही है कि इमारत की संरचनात्मक स्थिति की नियमित जांच हुई थी या नहीं।
सबसे पहला सवाल इमारत में कथित तौर पर जोड़ी गई अतिरिक्त मंजिलों को लेकर है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, MCD रिकॉर्ड में इमारत को P-14 के रूप में चिह्नित किया गया था। आरोप है कि मूल संरचना में बाद में बिना जरूरी अनुमति के अतिरिक्त फ्लोर जोड़े गए। अगर जांच में यह बात सही पाई जाती है, तो यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि निर्माण के दौरान संबंधित विभागों की ओर से निरीक्षण क्यों नहीं किया गया।दूसरा बड़ा सवाल मरम्मत कार्य को लेकर है। हादसे से करीब एक सप्ताह पहले इमारत के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत का काम चल रहा था। बताया जा रहा है कि बेसमेंट में नमी और पानी जमा होने जैसी समस्याएं भी थीं। ऐसे में यह जांच का अहम हिस्सा होगा कि मरम्मत शुरू करने से पहले किसी योग्य इंजीनियर से स्ट्रक्चरल असेसमेंट कराया गया था या नहीं। किसी लोड-बेयरिंग हिस्से में बदलाव हुआ था या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
तीसरा सवाल PG में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, इमारत में आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए अलग Emergency Exit नहीं था। इसके अलावा नियमित सेफ्टी चेक से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। PG में छात्रों से प्रति बेड हजारों रुपये किराया लिया जा रहा था, ऐसे में यह जानना जरूरी है कि उनके लिए फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्जिट जैसी बुनियादी सुविधाएं क्यों सुनिश्चित नहीं की गईं।
चौथा सवाल इलाके में पहले हो चुकी घटनाओं को लेकर है। स्थानीय जानकारी के मुताबिक, पिछले 15 वर्षों में इस इलाके में बिल्डिंग से जुड़ी कई घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2022 में भी एक हादसे में दो लोगों की जान गई थी। इसके बावजूद पुरानी और कमजोर इमारतों की नियमित जांच, फायर सेफ्टी निरीक्षण और स्ट्रक्चरल ऑडिट को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पांचवां सवाल प्रशासन को कथित शिकायतों और कार्रवाई से जुड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इमारत में पहले से दरारें साफ दिखाई दे रही थीं। दूसरी ओर, MCD का कहना है कि उसके पास इस इमारत को लेकर कोई आधिकारिक लिखित शिकायत नहीं आई थी। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या संभावित खतरे की पहचान के लिए प्रशासन को केवल लिखित शिकायत का इंतजार करना चाहिए या नियमित निरीक्षण के जरिए भी ऐसी इमारतों की पहचान की जानी चाहिए।
फिलहाल पुलिस संपत्ति के मालिकों, लीज एग्रीमेंट, PG संचालन की अनुमति, निर्माण में हुए बदलाव और स्ट्रक्चरल खामियों समेत कई पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे मुख्य वजह क्या थी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। सत्य निकेतन की यह घटना राजधानी में PG और पुरानी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है।