KNEWS DESK – दिवंगत फिल्ममेकर और प्रोड्यूसर यश जौहर की आज यानी 6 सितंबर को 97वीं बर्थ एनिवर्सरी है। इस खास मौके पर उनके बेटे और मशहूर फिल्ममेकर करण जौहर ने उन्हें भावुक अंदाज में याद किया। करण ने सोशल मीडिया पर अपने पिता की कुछ पुरानी तस्वीरें शेयर कीं और उनके साथ बिताए खूबसूरत पलों को याद करते हुए एक लंबा नोट लिखा। इस पोस्ट में जहां करण ने पिता के मजाकिया अंदाज का किस्सा सुनाया, वहीं उनके आखिरी दिनों की एक बेहद भावुक याद भी साझा की।
बचपन की तस्वीरों के साथ किया पिता को याद
करण जौहर ने इंस्टाग्राम पर यश जौहर के साथ अपनी बचपन की तस्वीरें शेयर कीं। पोस्ट की शुरुआत उन्होंने बेहद भावुक शब्दों में की। करण ने लिखा कि उन्हें अपने पिता की हर दिन याद आती है। इसके बाद उन्होंने यश जौहर के साथ अपने रिश्ते और उनकी जिंदगी से जुड़ी कई यादों को फैंस के साथ साझा किया।
करण के इस पोस्ट में पिता-पुत्र के रिश्ते की गर्माहट के साथ-साथ यश जौहर के सहज और मजाकिया स्वभाव की झलक भी देखने को मिली।
‘बर्बरी नहीं… बहुत बुरी है’, जैकेट वाला किस्सा सुनाया
करण ने अपनी फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ की रिलीज के बाद का एक मजेदार किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि फिल्म की सफलता के बाद उन्होंने जश्न मनाने के लिए अपनी पहली डिजाइनर जैकेट खरीदने का फैसला किया था। वह बर्बरी स्टोर पहुंचे और वहां उन्हें जो जैकेट फिट आई, उसे खरीद लिया।
करण को लगा कि वह जैकेट में काफी शानदार लग रहे हैं। लेकिन जब उन्होंने अपने पिता को जैकेट दिखाई तो यश जौहर ने उन्हें देखकर पूछा कि आखिर उन्होंने क्या पहन रखा है। करण ने गर्व से कहा कि यह बर्बरी है।
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इसके बाद यश जौहर ने पंजाबी अंदाज में मजाक करते हुए कहा, “बेटा ये बर्बरी नहीं… बहुत बुरी है।” करण ने बताया कि पहले उन्हें अपने पिता की बात से झटका लगा, लेकिन अगले ही पल वह जोर-जोर से हंसने लगे। करण के मुताबिक, उनके पिता बेहद जमीन से जुड़े, सरल और मजाकिया इंसान थे।
बेटे को हीरो बनाने का सपना देखते थे यश जौहर
करण ने बताया कि उनके पिता उनके सबसे बड़े फैन थे। यश जौहर उन्हें हमेशा प्रोत्साहित करते थे और कई बार कहते थे कि उन्हें हीरो बनना चाहिए। करण ने याद किया कि उनके पिता उनसे कहते थे कि वह इतने हैंडसम हैं कि उन्हें हीरो बन जाना चाहिए और घुड़सवारी सीखनी चाहिए।
करण ने इस बात को मजाकिया अंदाज में याद करते हुए लिखा कि क्या कोई उन्हें जुहू बीच पर घोड़े पर सवार होकर या फिर एक मेनस्ट्रीम हीरो के तौर पर कल्पना कर सकता है।
वहीं, करण की मां हिरू जौहर उन्हें ज्यादा व्यावहारिक सलाह देती थीं और उन्हें समझाती थीं कि वह कैमरे के सामने आने के लिए नहीं बने हैं।
पिता ने आखिरी दिनों में दी थी जिंदगी की सबसे बड़ी सीख
करण जौहर ने अपने पिता के आखिरी दिनों को याद करते हुए पोस्ट का सबसे भावुक हिस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि कीमोथेरेपी के एक सेशन के बाद यश जौहर ने उनसे कहा था कि उन्हें लग रहा है कि अब वह ज्यादा समय तक नहीं रह पाएंगे।
यश जौहर ने करण से एक वादा करने को कहा था कि वह हमेशा दयालु रहेंगे। उन्होंने अपने बेटे से कहा था कि अगर इंसान के अंदर दयालुता नहीं है तो सफलता का कोई मतलब नहीं है। साथ ही उन्होंने करण से अपनी मां का उसी तरह ख्याल रखने के लिए कहा था, जैसे उन्होंने पूरी जिंदगी रखा।
करण ने बताया कि पिता के वेंटिलेटर पर जाने के दौरान उन्होंने उनसे अपनी मां का ख्याल रखने का वादा किया था।
‘पापा मेरे हीरो थे’
करण ने अपने पिता को सिर्फ एक सफल फिल्ममेकर या प्रोड्यूसर नहीं, बल्कि अपना हीरो बताया। उन्होंने लिखा कि यश जौहर की दयालुता, विनम्रता और सादगी ने उन्हें काफी प्रभावित किया।
करण ने यह भी कहा कि पिता के जाने के 22 साल बाद भी उनकी जिंदगी में पैदा हुआ खालीपन वैसा ही है। उन्होंने लिखा कि वह उस खालीपन को भरना नहीं चाहते और न ही कभी भर पाएंगे।
करण के मुताबिक, जब कोई अपने माता-पिता को खोता है तो उसे एक भगवान मिल जाता है। उन्होंने कहा कि उनके लिए उनके पिता वही भगवान हैं और वह हर दिन उनसे प्रार्थना करते हैं। पोस्ट के अंत में करण ने एक बार फिर लिखा कि उन्हें अपने पिता की हर दिन याद आती है।
यश जौहर ने खड़ी की थी धर्मा प्रोडक्शंस की नींव
यश जौहर ने 1976 में धर्मा प्रोडक्शंस की स्थापना की थी और हिंदी सिनेमा में बतौर प्रोड्यूसर अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने ‘दोस्ताना’, ‘दुनिया’, ‘अग्निपथ’, ‘गुमराह’, ‘डुप्लीकेट’, ‘कुछ कुछ होता है’ और ‘कभी खुशी कभी गम’ जैसी फिल्मों का निर्माण किया।
‘कल हो ना हो’ उनकी आखिरी फिल्मों में शामिल रही। यश जौहर का 26 जून 2004 को 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद करण जौहर ने धर्मा प्रोडक्शंस की जिम्मेदारी संभाली और फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई।
करण की यह भावुक पोस्ट एक बार फिर दिखाती है कि इतने साल गुजर जाने के बावजूद उनके पिता की यादें और उनकी दी हुई सीख आज भी उनके दिल के बेहद करीब हैं।