रक्षाबंधन पर सबसे पहले बाबा महाकाल को बांधी गई राखी, शैव-वैष्णव परंपरा से सजी राखियों ने खींचा ध्यान

Ujjain Mahakal Raksha Bandhan: उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में रक्षाबंधन का पर्व विशेष धार्मिक परंपराओं के साथ मनाया गया. ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल का अभिषेक और भस्म आरती हुई, जिसके बाद उन्हें विशेष राखियां अर्पित की गईं. इस मौके पर भगवान को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग भी लगाया गया.

Knews Desk– उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में रक्षाबंधन का पर्व आस्था और भक्ति के विशेष माहौल में मनाया गया. श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर मंदिर में सबसे पहले बाबा महाकाल को राखी बांधने की परंपरा निभाई गई. शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे विशेष पूजन और अभिषेक के साथ धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई. इसके बाद बाबा महाकाल का भस्म से विशेष शृंगार किया गया और भस्म आरती संपन्न हुई.

महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश गुरु के मुताबिक, बाबा महाकाल के दरबार में रक्षाबंधन का त्योहार सबसे पहले भगवान को राखी अर्पित करके मनाने की परंपरा है. इसी परंपरा के तहत पुजारी और पुरोहित परिवार की महिलाओं ने अपने हाथों से तैयार की गई विशेष राखियां बाबा महाकाल को समर्पित कीं. इस दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए और परिवार की सुख-समृद्धि के साथ विश्व कल्याण की प्रार्थना की.

इस बार बाबा महाकाल को अर्पित की गई राखियों में धार्मिक विविधता की खास झलक देखने को मिली. पंडित ओम गुरु के परिवार की महिलाओं ने ऐसी राखी तैयार की, जिसमें शैव और वैष्णव परंपराओं का सुंदर मेल नजर आया. राखी में भगवान श्रीकृष्ण के मोरपंख और गोमाता के प्रतीक के साथ भगवान शिव का त्रिशूल, डमरू और रुद्राक्ष भी शामिल किए गए. इस अनोखी राखी ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया.

वहीं, पंडित राजेश शर्मा के परिवार की ओर से तैयार की गई राखी भी बाबा महाकाल को अर्पित की गई. इसे लेस और रेशमी कपड़े से सजाया गया था. दोनों राखियों को धार्मिक विधि-विधान के साथ भगवान को समर्पित किया गया.

विशेष पूजन और भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया गया. इसके बाद प्रसादी श्रद्धालुओं में वितरित की गई. मंदिर के पुजारी पंडित राघव शर्मा ने बताया कि श्रावण मास में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास रखते हैं. ऐसे में रक्षाबंधन के दिन बाबा महाकाल को चढ़ाए गए लड्डुओं की प्रसादी ग्रहण करने के बाद कई भक्त अपना व्रत खोलते हैं.

रक्षाबंधन के इस विशेष अवसर पर महाकाल मंदिर में सुबह से ही भक्तों में उत्साह देखने को मिला. धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल से अपने परिवार की खुशहाली, सुख-शांति और पूरे विश्व के कल्याण की कामना की.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *