Knews Desk: टाटा ग्रुप से जुड़ा एक अहम मामला इन दिनों चर्चा में है। सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) अपनी बैठकों पर लगी रोक हटवाने के लिए इस हफ्ते महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर के सामने नई अपील दाखिल करने की तैयारी कर रहा है। ट्रस्ट की बैठकों पर लगी पाबंदी का असर अब टाटा सन्स के नए चेयरमैन की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी पड़ने लगा है। इसके अलावा करीब 400 करोड़ रुपये के ग्रांट और कई जरूरी फैसले भी अटके हुए हैं।
टाटा सन्स के मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन पहले ही बोर्ड को बता चुके हैं कि वह अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद पद पर बने नहीं रहेंगे। उनका कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है। ऐसे में नए चेयरमैन की नियुक्ति की प्रक्रिया समय पर शुरू करना जरूरी है। टाटा सन्स के नियमों के मुताबिक चेयरमैन के चयन के लिए पांच सदस्यों वाली एक विशेष समिति बनाई जाती है। इसमें तीन सदस्यों को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट मिलकर नामित करते हैं। लेकिन SRTT की बैठकों पर लगी रोक के चलते ट्रस्ट इस प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ पा रहा है। यही वजह है कि ट्रस्ट अब जल्द से जल्द पाबंदी हटवाना चाहता है।
ट्रस्ट की बैठकों पर रोक का असर टाटा ग्रुप की सालाना आम बैठक यानी AGM पर भी पड़ा। 18 अगस्त को होने वाली AGM को टाटा ग्रुप के इतिहास में पहली बार टालना पड़ा। ट्रस्ट के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बैठकों को दोबारा शुरू कराना है, ताकि नए चेयरमैन की नियुक्ति समेत दूसरे जरूरी फैसले लिए जा सकें।दरअसल, पूरा विवाद एडवोकेट कात्यायनी अग्रवाल की शिकायत के बाद शुरू हुआ। शिकायत में आरोप लगाया गया कि SRTT के बोर्ड में लाइफटाइम ट्रस्टियों की संख्या तय सीमा से ज्यादा है। महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट की धारा 30(A)(2) के तहत किसी ट्रस्ट में लाइफटाइम सदस्यों की संख्या 25 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती। ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने भी इसी तरह की चिंता जताई थी। इसके बाद महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर एएस कालोटी ने 15 मई को जांच पूरी होने तक ट्रस्ट की बैठकों पर रोक लगा दी थी। अगस्त में विजय सिंह के इस्तीफे के बाद लाइफटाइम सदस्यों का अनुपात और बढ़ गया, जिससे विवाद और गंभीर हो गया।
बैठकों पर रोक का असर ट्रस्ट के कामकाज और आर्थिक फैसलों पर भी पड़ा है। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने पहले चिंता जताते हुए बताया था कि करीब 400 करोड़ रुपये के महत्वपूर्ण ग्रांट अटके हुए हैं। इसके अलावा जरूरी खातों को मंजूरी देने जैसे कई काम भी प्रभावित हो रहे हैं।दिलचस्प बात यह है कि ट्रस्ट इस मामले को लेकर सीधे बॉम्बे हाईकोर्ट जाने से बच रहा है। माना जा रहा है कि लंबी कानूनी प्रक्रिया से मामले के निपटारे में और देरी हो सकती है। इसलिए ट्रस्ट फिलहाल चैरिटी कमिश्नर के स्तर पर ही राहत पाने की कोशिश कर रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि चैरिटी कमिश्नर ट्रस्ट की नई अपील पर क्या फैसला लेते हैं। अगर बैठकों पर लगी रोक हटती है, तो टाटा सन्स के नए चेयरमैन की तलाश और अन्य जरूरी फैसलों की प्रक्रिया फिर से आगे बढ़ सकती है।