IIT दिल्ली में छात्रों का गुस्सा बरकरार, तीसरे दिन भी प्रदर्शन; कमेटी से पूर्व DGP ने हटाया नाम

Knews Desk: IIT दिल्ली में छात्रों का विरोध प्रदर्शन बुधवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। MSc फिजिक्स के 31 वर्षीय छात्र ऋषिकेश कुमार की कथित आत्महत्या के बाद शुरू हुआ यह आंदोलन अब लगातार तेज होता जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र कैंपस में ऐसा माहौल बनाने की मांग कर रहे हैं, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। छात्रों का दावा है कि पिछले 30 महीनों में IIT दिल्ली में 8 छात्रों ने आत्महत्या की है।

छात्रों के विरोध के बीच IIT दिल्ली प्रशासन ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। हालांकि, कमेटी बनने के अगले ही दिन उत्तराखंड के पूर्व DGP और IIT दिल्ली के पूर्व छात्र अशोक कुमार ने अपना नाम इस कमेटी से वापस ले लिया। अशोक कुमार को कमेटी की अध्यक्षता की जिम्मेदारी दी गई थी। अब IIT दिल्ली प्रशासन की ओर से जल्द ही उनकी जगह नए सदस्य के नाम का ऐलान किए जाने की उम्मीद है।

इस कमेटी में AIIMS नई दिल्ली के साइकियाट्री विभाग के प्रमुख प्रो. प्रताप शर्मा, दो छात्र प्रतिनिधि और IIT दिल्ली के रजिस्ट्रार को शामिल किया गया था। रजिस्ट्रार को कमेटी में सचिव और संयोजक की भूमिका दी गई थी। कमेटी को दो सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया था। अशोक कुमार के नाम वापस लेने के बाद अब कमेटी की संरचना में बदलाव किया जाएगा।छात्रों का आरोप है कि कैंपस में छात्रों से जुड़े मानसिक दबाव और अन्य समस्याओं को गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है। प्रदर्शनकारी छात्र स्टूडेंट्स अफेयर्स डीन और केमिस्ट्री विभाग के प्रमुख समेत कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। छात्रों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी उठाई है। इसके अलावा ऋषिकेश कुमार के परिवार को मुआवजा देने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है। छात्रों की ओर से पहले चार वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफे और परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग रखी गई थी।

आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए छात्रों ने अब IIT दिल्ली के एलुमनाई को भी इससे जोड़ने का फैसला किया है। इसके लिए सिग्नेचर कैंपेन चलाने की तैयारी है। छात्र प्रशासन से अपनी सभी मांगों को स्वीकार करने की अपील करते हुए हस्ताक्षर अभियान चलाएंगे। जिम्मेदारी वाले पदों पर मौजूद छात्रों से भी आंदोलन के समर्थन में पत्र पर हस्ताक्षर करने की अपील की जाएगी।प्रदर्शनकारी छात्रों ने कथित डराने-धमकाने और दबाव बनाने के मामलों को लेकर भी सबूत जुटाने का फैसला किया है। बैठक में फैकल्टी-पियर और पियर-टू-पियर स्तर पर कथित तौर पर सामने आए मामलों पर चर्चा हुई। छात्रों का कहना है कि ऐसे मामलों के सबूत एकत्र कर उन्हें उचित शिकायत निवारण व्यवस्था के सामने रखा जाएगा।

आंदोलन के दौरान छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र को कक्षा में जाने से नहीं रोका जाएगा। छात्रों के मुताबिक कक्षाओं का बहिष्कार करना या प्रदर्शन में शामिल होना प्रत्येक छात्र का व्यक्तिगत फैसला होगा। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी छात्र पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि सामूहिक रूप से अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाना है।छात्रों ने यह भी तय किया है कि प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर पर्याप्त कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। आंदोलन की अगली रणनीति छात्रों की सामूहिक बैठकों में तय की जाएगी। वहीं दिल्ली पुलिस ने भी मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि IIT दिल्ली प्रशासन नई जांच कमेटी में किसे शामिल करता है और छात्रों की मांगों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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