11 एयरपोर्ट के निजीकरण की तैयारी, एक कंपनी को ज्यादा एयरपोर्ट नहीं देगी सरकार

Knews Desk: देश में एयरपोर्ट के निजीकरण की प्रक्रिया के अगले चरण की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के 11 एयरपोर्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी कर रही है। हालांकि, इस बार सरकार किसी एक कंपनी के हाथ में बहुत ज्यादा एयरपोर्ट जाने से रोकने के लिए बिडिंग कैप लगाने की योजना बना रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेजल कमेटी (PPPAC) ने 4 अगस्त को इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। सरकार का उद्देश्य एयरपोर्ट सेक्टर में किसी एक कंपनी के अत्यधिक प्रभाव और संभावित एकाधिकार को रोकना है।

5 बंडल में बांटे जाएंगे 11 एयरपोर्ट

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 11 एयरपोर्ट को पांच अलग-अलग बंडल में बांटने का प्रस्ताव रखा है। इनमें अमृतसर-कांगड़ा, वाराणसी-गया-कुशीनगर, भुवनेश्वर-हुबली, रायपुर-औरंगाबाद और तिरुचिरापल्ली-तिरुपति एयरपोर्ट शामिल हैं। हर बंडल को एक निजी कंपनी को लीज पर दिया जाएगा। इन 11 एयरपोर्ट के संचालन और विकास के लिए निजी कंपनियों को करीब 8,622 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा।

AAI कर्मचारियों के लिए भी नियम

एयरपोर्ट निजी हाथों में जाने के बाद कर्मचारियों की नौकरी को लेकर भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। शुरुआती एक साल तक AAI और निजी ऑपरेटर की टीम संयुक्त रूप से एयरपोर्ट का संचालन करेगी। इसके अलावा निजी कंपनी को कम से कम तीन साल तक AAI के 60 फीसदी कर्मचारियों को बनाए रखना होगा।

क्यों लगाया जा रहा है बिडिंग कैप?

सरकार का मानना है कि किसी एक कंपनी के पास बहुत ज्यादा एयरपोर्ट होने से उसके ऊपर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। अगर किसी एक प्रोजेक्ट में आर्थिक परेशानी आती है तो इसका असर उसके दूसरे एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स पर भी पड़ सकता है। इसलिए सरकार निजीकरण के साथ जोखिम को भी सीमित करना चाहती है। इससे पहले 2018-19 में छह एयरपोर्ट को PPP मॉडल के तहत निजी कंपनियों को सौंपा गया था। मौजूदा समय में अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स और GMR जैसे बड़े समूह एयरपोर्ट सेक्टर में बड़े निवेश की योजनाएं बना रहे हैं।

एयरपोर्ट और एयरलाइन एक ही कंपनी के पास?

एयरपोर्ट निजीकरण के साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन कारोबार में उतरने की अनुमति दी जानी चाहिए। इंडिगो के सह-संस्थापक राहुल भाटिया ने ऐसी संभावना पर हितों के टकराव की आशंका जताई है।

वहीं, GMR ने एयरलाइन कारोबार में उतरने की किसी योजना से इनकार किया है। ऐसे में सरकार के नए नियमों से एयरपोर्ट सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और एकाधिकार दोनों को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *