Knews Desk– श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में ध्रुव जुरेल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए अपने टेस्ट करियर का यादगार शतक जड़ा। नंबर-7 पर बल्लेबाजी करने उतरे जुरेल ने 115 रनों की बेहतरीन पारी खेली और टीम इंडिया को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी इस पारी में ऋषभ पंत का भी खास योगदान रहा। जुरेल ने बताया कि वह टीम में बल्लेबाजी को लेकर सबसे ज्यादा सलाह पंत से लेते हैं, लेकिन उनकी बल्लेबाजी शैली को कॉपी नहीं करते।
जुरेल ने शतक के बाद मीडिया से बातचीत में ऋषभ पंत की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि पंत ने भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी मुश्किल परिस्थितियों में शानदार प्रदर्शन किया है और उनके पास काफी अनुभव है। यही वजह है कि जब भी जुरेल को किसी खास परिस्थिति में बल्लेबाजी को लेकर सलाह की जरूरत होती है, तो वह पंत से बात करते हैं।
जुरेल ने कहा कि पंत से सलाह लेने की सबसे बड़ी वजह यह है कि दोनों विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं और मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी करते हैं। ऐसे में मैच की परिस्थितियों और विपक्षी गेंदबाजों को लेकर पंत की सलाह उनके लिए काफी उपयोगी होती है। जुरेल के मुताबिक, वह पंत से यह समझने की कोशिश करते हैं कि किसी खास गेंदबाज के खिलाफ किस तरह बल्लेबाजी करनी चाहिए और किन गेंदों को खेलने पर ध्यान देना चाहिए।हालांकि, जुरेल ने यह भी साफ कर दिया कि वह पंत की आक्रामक बल्लेबाजी शैली को अपनी बल्लेबाजी में उतारने की कोशिश नहीं करते। उनसे जब पूछा गया कि क्या पंत के दबदबे वाले अंदाज की नकल करने का लालच होता है, तो जुरेल ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाजी करने के अलग-अलग तरीके होते हैं और यही इस फॉर्मेट की खूबसूरती है।
जुरेल ने कहा कि पंत जिस तरह की बल्लेबाजी करते हैं, वह उनके खेल का हिस्सा है और वह लंबे समय से उसी अंदाज में खेल रहे हैं। जुरेल का मानना है कि वह पंत की तरह शुरुआत से आक्रामक क्रिकेट नहीं खेल सकते। उनकी अपनी बल्लेबाजी योजना अलग है। वह गेंदबाज और गेंद की स्थिति को समझकर अपने शॉट्स का चयन करते हैं।कोलंबो टेस्ट में जुरेल और पंत की साझेदारी ने भारत के लिए बड़ा अंतर पैदा किया। दोनों ने मिलकर 112 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की। जुरेल ने जहां 115 रन बनाए, वहीं चोट के बावजूद पंत ने 63 रनों की उपयोगी पारी खेली। दोनों की साझेदारी ने भारत को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
जुरेल की शतकीय पारी इसलिए भी खास रही क्योंकि उन्होंने दबाव के बीच संयम दिखाया और अपनी बल्लेबाजी शैली के मुताबिक रन बनाए। उन्होंने पंत के साथ साझेदारी के दौरान भी आक्रामकता और सावधानी के बीच अच्छा संतुलन कायम रखा।इस पारी के बाद जुरेल ने यह भी दिखाया कि भारतीय टीम के पास विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर एक और मजबूत विकल्प मौजूद है। पंत से अनुभव और सलाह लेना उनके लिए फायदेमंद जरूर है, लेकिन अपनी अलग बल्लेबाजी पहचान बनाए रखना भी जुरेल की रणनीति का हिस्सा है। कोलंबो में 115 रन की पारी और पंत के साथ 112 रनों की साझेदारी ने इस बात को साबित भी कर दिया।