KNEWS DESK- लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह की मुलाकात के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। दोनों नेताओं के बीच आरक्षण, पिछड़े वर्गों के अधिकार, संविधान की रक्षा और आगामी राजनीतिक रणनीति समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद संजय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला।
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा संविधान और आरक्षण व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन गई है। उन्होंने दावा किया कि आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं। संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश की 69 हजार शिक्षक भर्ती का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि इस भर्ती प्रक्रिया में पिछड़े वर्गों के अधिकारों की अनदेखी की गई।
उन्होंने कहा कि पिछड़े और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर संसद और सुप्रीम कोर्ट तक जारी रहेगी। संजय सिंह के मुताबिक, अखिलेश यादव के साथ हुई बैठक में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों के साथ विपक्षी एकजुटता को लेकर भी चर्चा हुई। ऐसे में इस मुलाकात को आने वाले समय की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
शिक्षा व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा
संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि प्रदेश के कई सरकारी स्कूल बदहाल स्थिति में हैं। उनके मुताबिक, कहीं स्कूलों की छत खराब है, कहीं भवन जर्जर हैं तो कहीं शिक्षकों की कमी है।
उन्होंने सुल्तानपुर, सिद्धार्थनगर और प्रतापगढ़ समेत कई जिलों का जिक्र करते हुए सरकारी स्कूलों की स्थिति पर सवाल उठाए। संजय सिंह ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को लेकर लगातार अभियान चला रही है।
सोनभद्र के स्कूल का किया जिक्र
संजय सिंह ने सोनभद्र के करमा ब्लॉक स्थित एक प्राथमिक विद्यालय की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल में बच्चे कीचड़, सीलन और गिरते प्लास्टर के बीच पढ़ने को मजबूर हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर सरकारी स्कूलों की स्थिति ऐसी रहेगी तो देश का भविष्य कैसे बेहतर होगा?
संजय सिंह ने योगी सरकार से इन आरोपों पर जवाब मांगा और पूछा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर सुविधाएं कब मिलेंगी। अखिलेश यादव से मुलाकात और आरक्षण के मुद्दे पर संजय सिंह के हमले के बाद उत्तर प्रदेश में विपक्षी एकजुटता और सामाजिक न्याय की राजनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।