BCI विवाद में नया मोड़, मनन मिश्रा ने आरोपों को किया खारिज

KNEWS DESK- बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) में चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा और को-चेयरमैन वाईआर सदाशिव रेड्डी के बीच विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। सदाशिव रेड्डी ने मनन कुमार मिश्रा पर नियुक्तियों में कथित अनियमितता, धन के दुरुपयोग और कामकाज में पारदर्शिता की कमी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मिश्रा से तत्काल इस्तीफा देने और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

इन आरोपों पर अब मनन कुमार मिश्रा ने पलटवार करते हुए सभी दावों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। मिश्रा ने यह भी कहा कि अगर किसी को ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन पर संदेह है तो उसके खातों की जांच करा ली जाए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बिना आधार के आरोप लगा रहे हैं और इन आरोपों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। दरअसल, BCI के सह-अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता वाईआर सदाशिव रेड्डी ने शनिवार सुबह मिश्रा को पत्र लिखकर कई सवाल उठाए। उन्होंने परिषद में कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां जताईं। रेड्डी का आरोप है कि कई नियुक्तियां पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के बिना की गईं और बड़ी संख्या में कर्मचारी मनन कुमार मिश्रा से व्यक्तिगत रूप से जुड़े हुए हैं।

रेड्डी ने दावा किया कि मौजूदा स्टाफ की सूची और कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी की समीक्षा करने के बाद उन्हें नियुक्तियों में एक खास पैटर्न नजर आया। उनके मुताबिक, कई कर्मचारी मिश्रा के परिवार या व्यक्तिगत परिचितों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। सदाशिव रेड्डी ने अपने पत्र में BCI की विशेष बैठक बुलाने की मांग भी की है, ताकि इन आरोपों और परिषद के कामकाज से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा हो सके। उन्होंने नियुक्तियों, वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

वहीं, मनन कुमार मिश्रा ने आरोपों को खारिज करते हुए जांच से पीछे हटने के बजाय खातों की जांच कराने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि किसी को वित्तीय मामलों को लेकर कोई संदेह है तो संबंधित खातों की जांच कराई जा सकती है और तथ्यों के आधार पर स्थिति साफ हो जाएगी।

BCI के भीतर सामने आया यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब संस्था के कामकाज और चेयरमैन के कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि परिषद इस पूरे विवाद पर क्या कदम उठाती है और आरोपों की जांच के लिए कोई स्वतंत्र प्रक्रिया शुरू होती है या नहीं। फिलहाल दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच BCI का यह विवाद और गहराता दिखाई दे रहा है।

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