KNEWS DESK- रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी सुरक्षा का वचन देते हैं। बाजार में आजकल कई तरह की राखियां उपलब्ध हैं, जिनमें अलग-अलग रंग, डिजाइन और धार्मिक प्रतीक देखने को मिलते हैं। ऐसे में राखी खरीदते समय कई लोग धार्मिक मान्यताओं और शुभ-अशुभ संकेतों का भी ध्यान रखते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी सिर्फ एक धागा नहीं बल्कि रक्षा सूत्र का प्रतीक है। इसलिए इसे खरीदते और बांधते समय कुछ बातों का ध्यान रखना शुभ माना जाता है। हालांकि, ये बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं, इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
कौन से रंग की राखी शुभ मानी जाती है?
धार्मिक दृष्टि से मौली या कलावा को सबसे पवित्र रक्षासूत्र माना जाता है। इसके अलावा लाल, पीले और केसरिया रंग की राखी को भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ये रंग सकारात्मकता, मंगल और ऊर्जा से जुड़े होते हैं।
अगर आप धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखकर राखी खरीद रहे हैं तो साफ-सुथरी और साधारण डिजाइन वाली राखी को प्राथमिकता दे सकते हैं। बहुत ज्यादा भारी या असहज राखी की जगह ऐसी राखी चुनना बेहतर है जिसे भाई आसानी से लंबे समय तक पहन सके।
सबसे शुभ राखी कौन सी मानी जाती है?
लाल, पीले या केसरिया रंग की राखी, जिस पर ॐ, स्वस्तिक, भगवान गणेश या रुद्राक्ष जैसे शुभ प्रतीक बने हों, धार्मिक मान्यताओं में विशेष मानी जाती है। मौली या कलावा भी रक्षा सूत्र के रूप में बांधा जा सकता है।
इन प्रतीकों को हिंदू परंपरा में शुभता और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। हालांकि, राखी की शुभता मुख्य रूप से आस्था और परंपरा का विषय है।
भगवान की तस्वीर वाली राखी खरीदें या नहीं?
बाजार में भगवान की तस्वीर और धार्मिक प्रतीकों वाली राखियां भी खूब मिलती हैं। ऐसी राखी खरीदने में कोई विशेष मनाही नहीं बताई जाती, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन्हें सम्मान के साथ रखना चाहिए।
अगर ऐसी राखी टूट जाए या पुरानी हो जाए तो उसे सामान्य कचरे में फेंकने के बजाय किसी सम्मानजनक स्थान पर रखना या धार्मिक परंपरा के अनुसार विसर्जित करना उचित माना जाता है। यही वजह है कि कुछ लोग भगवान की तस्वीर के बजाय ॐ, स्वस्तिक या रुद्राक्ष वाली राखी को प्राथमिकता देते हैं।
किन राखियों से बचना बेहतर माना जाता है?
अगर आप धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हैं तो ऐसी राखियों से बच सकते हैं जिन पर डरावने चेहरे, नकारात्मक भाव वाले चिन्ह या ऐसे प्रतीक बने हों जिन्हें शुभ नहीं माना जाता।
इसके अलावा राखी खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा का भी ध्यान रखना चाहिए। बहुत नुकीले डिजाइन, धातु के तेज किनारे या ऐसी सजावट जो कलाई में चुभ सकती है, उससे बचना बेहतर है। राखी सुंदर होने के साथ आरामदायक भी होनी चाहिए।
क्या काली राखी बांधना अशुभ है?
काली राखी को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ धार्मिक परंपराओं में काले रंग को नकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए रक्षाबंधन जैसे शुभ अवसर पर लाल, पीले, केसरिया या अन्य पारंपरिक शुभ रंगों को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है।
हालांकि, काली राखी को लेकर कोई सार्वभौमिक धार्मिक नियम नहीं है। यह काफी हद तक परिवार, क्षेत्र और व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है।
रक्षाबंधन 2026 कब मनाया जाएगा?
साल 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। दी गई पंचांग जानकारी के अनुसार, राखी बांधने का मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया गया है। इस दौरान कुल 3 घंटे 51 मिनट का समय रहेगा।
इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा। अलग-अलग शहरों और पंचांग परंपराओं के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना बेहतर है।
राखी बांधते समय कौन सा मंत्र बोलें?
राखी बांधते समय भाई की दाहिनी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने के दौरान यह वैदिक मंत्र बोला जाता है—
“ॐ येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वां प्रतिबध्नामि, रक्षे मा चल मा चलः।”
मान्यता है कि इस मंत्र के माध्यम से भाई की रक्षा और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इसका भावार्थ है कि जिस शक्तिशाली रक्षा सूत्र से राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से भाई की रक्षा के लिए यह सूत्र बांधा जा रहा है।
राखी में कितनी गांठ लगानी चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी बांधते समय तीन गांठें लगाना शुभ माना जाता है। इन गांठों को अलग-अलग शुभ संकल्पों से जोड़ा जाता है। कई परिवारों में अपनी परंपरा के अनुसार पांच गांठें लगाने का भी चलन है।
रक्षाबंधन का मूल भाव भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का है। इसलिए राखी का रंग या डिजाइन चाहे जो हो, सबसे महत्वपूर्ण बात इस रिश्ते की भावना और एक-दूसरे के प्रति सम्मान है।
डिस्क्लेमर: राखी के रंग, डिजाइन, शुभ-अशुभ प्रतीक, मंत्र और गांठों से जुड़ी जानकारी धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में परंपराएं अलग हो सकती हैं। इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और परंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए।