KNEWS DESK – बरेली जिले के अलीगंज थाना क्षेत्र के गौटिया गांव में 17 वर्षीय हाईस्कूल छात्रा की हत्या के मामले में पुलिस ने उसके चाचा जयप्रकाश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर लोकलाज और परिवार की ‘आन’ के नाम पर अपनी नाबालिग भतीजी की हत्या की। इसके बाद शव को खेत में दफना दिया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अंधविश्वास के चलते छात्रा के दोनों पैरों में लोहे की तीन-तीन कीलें भी ठोंक दी थीं। उसका दावा था कि ऐसा करने से मृतका की आत्मा चुड़ैल बनकर भटक नहीं सकेगी।
खेत से बरामद हुआ छात्रा का शव
मामला करीब पांच दिन बाद सामने आया। छात्रा के दादा नत्थूलाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 28 जुलाई की सुबह करीब 9 बजे जयप्रकाश अपनी भतीजी लता को मिर्च के खेत में काम करने के लिए ले गया था।
शाम को जयप्रकाश अकेला घर लौटा। जब परिवार ने लता के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसका पड़ोस के एक युवक से प्रेम प्रसंग था और वह उसी के साथ चली गई है।
परिवार के लोगों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन कई दिनों तक छात्रा का कोई पता नहीं चला। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच शुरू हुई।
पूछताछ में खुला हत्या का राज
जांच के दौरान पुलिस को जयप्रकाश की भूमिका पर शक हुआ। सख्ती से पूछताछ करने पर उसने छात्रा की हत्या करने की बात कबूल कर ली।
आरोपी की निशानदेही पर 18 अगस्त को पुलिस ने अनिरुद्धपुर गौटिया के एक खेत में खुदाई कराई। इसी दौरान जमीन के अंदर से छात्रा का शव बरामद हुआ।
पुलिस के मुताबिक, जयप्रकाश ने पूछताछ में बताया कि उसने दुपट्टे और अंगोछे से लता का गला कस दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद शव को खेत में ले जाकर दफना दिया।
मौत के बाद भी नहीं छोड़ा, पैरों में ठोंकी कीलें
पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद आरोपी ने छात्रा के दोनों पैरों में तीन-तीन लोहे की कीलें ठोंक दीं। आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने यह अंधविश्वासी टोटका इस डर से किया कि लता की आत्मा चुड़ैल बनकर भटक न जाए और किसी को परेशान न करे। पुलिस ने पैरों में ठोंकी गई कीलों को भी जांच के लिए सुरक्षित कर लिया है।
एसएसपी अनुराग आर्य के मुताबिक, आरोपी चाचा जयप्रकाश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है। मामले की विवेचना थाना प्रभारी जगत सिंह को सौंपी गई है।
पुलिस छात्रा के माता-पिता की भी तलाश कर रही है। जांच में अगर उनकी भूमिका या किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि कथित ‘इज्जत’ और अंधविश्वास के नाम पर उठाया गया एक कदम किस तरह एक नाबालिग की जिंदगी खत्म कर सकता है।