Uttarakhand Election 2027: ‘वन सीट-वन प्रभारी’ और ‘टारगेट-23’… BJP के इस प्लान में कितना दम?

KNEWS DESK – उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बीजेपी ने अभी से अपनी चुनावी रणनीति पर काम तेज कर दिया है. पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में हारी हुई 23 सीटों को सबसे बड़ा टारगेट बनाया है. इन सीटों पर अब सिर्फ सामान्य समीक्षा नहीं होगी, बल्कि हर विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता को सौंपी जा रही है.

बीजेपी ने इसके लिए ‘वन सीट-वन प्रभारी’ का माइक्रो मैनेजमेंट मॉडल तैयार किया है. यानी पार्टी पूरे राज्य को एक साथ मैनेज करने के बजाय हर विधानसभा सीट की अलग राजनीतिक स्थिति, संगठन और स्थानीय मुद्दों पर फोकस करेगी.

खटीमा समेत 23 सीटों पर खास नजर

उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लक्ष्य के साथ बीजेपी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. प्रदेश कोर ग्रुप की बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सीट खटीमा समेत उन 23 विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष फोकस करने का फैसला लिया गया, जहां 2022 में पार्टी को हार मिली थी.

इन सीटों पर संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ वरिष्ठ नेताओं को सीधे निगरानी की जिम्मेदारी दी जा रही है. पार्टी चाहती है कि चुनाव से काफी पहले इन सीटों की जमीनी स्थिति को समझ लिया जाए और कमजोरियों को दूर किया जाए.

बड़े नेताओं को मिली जिम्मेदारी

बीजेपी ने 23 कमजोर सीटों पर अपने बड़े नेताओं को मैदान में उतारने की रणनीति बनाई है.मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को खटीमा की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं सांसद अनिल बलूनी को बदरीनाथ और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को पिरान कलियर सीट की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

इसके अलावा बाकी विधानसभा क्षेत्रों में भी सांसदों, मंत्रियों और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है.

इसका मकसद सिर्फ चुनाव के दौरान प्रचार करना नहीं, बल्कि अभी से संबंधित विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक नब्ज को समझना है.

हर सीट का अलग ‘रिपोर्ट कार्ड’

बीजेपी की रणनीति के तहत हर प्रभारी को अपनी विधानसभा सीट की विस्तृत जानकारी जुटानी होगी. इसमें संगठन की स्थिति, स्थानीय नाराजगी, जनता के प्रमुख मुद्दे, संभावित उम्मीदवार, सामाजिक और जातीय समीकरण और बूथ स्तर की मजबूती जैसे पहलू शामिल होंगे.

इस तरह पार्टी उत्तराखंड की सभी 70 सीटों को एक इकाई मानकर रणनीति बनाने के बजाय हर विधानसभा क्षेत्र के लिए अलग चुनावी प्लान तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.

2022 की हार से सबक लेने की कोशिश

बीजेपी के आंतरिक आकलन में 2022 में कुछ सीटों पर हार के पीछे स्थानीय असंतोष, टिकट को लेकर नाराजगी और संगठन की कमजोरी जैसे कारणों की चर्चा हुई थी.

पार्टी इस बार इन समस्याओं को चुनाव से काफी पहले दूर करना चाहती है. यही वजह है कि कमजोर सीटों पर वरिष्ठ नेताओं की तैनाती अभी से की जा रही है.

बीजेपी का फोकस सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को संगठन के जरिए बूथ स्तर तक पहुंचाने के साथ-साथ स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं की नाराजगी को दूर करने पर भी है.

दिल्ली की बैठक से मिले 5 बड़े संकेत

बीजेपी की हालिया रणनीति से पार्टी के चुनावी प्लान के पांच बड़े संकेत मिलते हैं—

पहला, 2027 की लड़ाई के लिए पार्टी अभी से आक्रामक तैयारी कर रही है.

दूसरा, 23 कमजोर सीटों पर वरिष्ठ नेताओं की लगातार निगरानी रहेगी.

तीसरा, सरकार और संगठन के बीच तालमेल को और मजबूत किया जाएगा.

चौथा, स्थानीय नाराजगी और संगठनात्मक कमियों को चुनाव से पहले दूर करने की कोशिश होगी.

पांचवां, हर विधानसभा क्षेत्र का अलग राजनीतिक रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा.

बीजेपी का लक्ष्य साफ है—2027 में सत्ता की हैट्रिक. अब देखना होगा कि 23 कमजोर सीटों पर शुरू किया गया यह माइक्रो मैनेजमेंट मॉडल पार्टी को पिछली हार का हिसाब बराबर करने में कितना मदद करता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *