KNEWS DESK – दिल्ली सरकार की ‘लक्ष्मी योजना’ के तहत पात्र महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता के आवेदन में स्थानीय सांसद या विधायक की सिफारिश अनिवार्य किए जाने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इस शर्त पर आपत्ति जताते हुए पूछा कि किसी महिला की पात्रता तय करने के लिए उसके क्षेत्र के MP या MLA की सिफारिश क्यों जरूरी होनी चाहिए.
दरअसल, दिल्ली सरकार की इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जानी है. योजना के ऑनलाइन पोर्टल पर MP/MLA का समर्थन पत्र जरूरी दस्तावेजों में शामिल किया गया है.
‘MP-MLA क्या सोचते हैं, इस पर कैसे निर्भर होगी पात्रता?’
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी महिला की पात्रता इस बात पर निर्भर नहीं हो सकती कि उसके क्षेत्र का सांसद या विधायक उसके बारे में क्या सोचता है.
कोर्ट ने सवाल किया कि अगर कोई महिला अपने इलाके के सांसद या विधायक से सिफारिश हासिल नहीं कर पाती, तो क्या सिर्फ इसी वजह से वह योजना का लाभ लेने के लिए अयोग्य हो जाएगी? कोर्ट के मुताबिक, पात्रता जांचने के लिए दूसरे दस्तावेज और निर्धारित मानदंड मौजूद हैं.
योजना की शर्तों में क्या है?
दिल्ली सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर MP/MLA के समर्थन पत्र को आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेजों में शामिल किया गया है. इसके अलावा आधार कार्ड, दिल्ली वोटर आईडी, फोटो और हस्ताक्षर समेत अन्य दस्तावेज मांगे गए हैं.
सरकार की ओर से पहले यह तर्क दिया गया था कि स्थानीय सांसद या विधायक अपने क्षेत्र के लोगों से परिचित होते हैं और उनके समर्थन से वास्तविक लाभार्थियों की पहचान में मदद मिल सकती है.
हालांकि, हाईकोर्ट ने इसी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी कल्याणकारी योजना का लाभ लेने की पात्रता को निर्वाचित जनप्रतिनिधि की व्यक्तिगत सिफारिश से जोड़ना उचित नहीं माना जा सकता.
क्लॉज-4 का भी कोर्ट ने लिया संज्ञान
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गौर किया कि योजना के क्लॉज-4 में पात्रता की शर्तों के तहत MP या MLA से पत्र लेने की बात नहीं कही गई है. इसके बावजूद आवेदन प्रक्रिया में इस तरह की सिफारिश को अनिवार्य किए जाने पर अदालत ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है.
कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वकील को सरकार से निर्देश लेने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होने की संभावना है.
योजना में मिलते हैं हर महीने 2,500 रुपये
दिल्ली सरकार की ‘लक्ष्मी योजना’ के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है. योजना के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 1 अगस्त से शुरू हुआ था और शुरुआती घंटों में ही बड़ी संख्या में महिलाओं ने आवेदन किया था.
अब हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दिल्ली सरकार आवेदन प्रक्रिया में MP-MLA के समर्थन पत्र की अनिवार्यता को बरकरार रखेगी या इसमें बदलाव किया जाएगा.
फिलहाल अदालत ने इस शर्त को अंतिम रूप से रद्द नहीं किया है, लेकिन उसकी वैधता और जरूरत पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं.