BJP से इस्तीफे के बाद बोले शहजाद पूनावाला- ‘राजनीति नौकरी नहीं, लेकिन गुजारा भी जरूरी’

KNEWS DESK- बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। टीवी डिबेट में भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे पूनावाला ने बताया कि उन्होंने यह फैसला आर्थिक और निजी परिस्थितियों को देखते हुए लिया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी छोड़ने के बावजूद वह पार्टी की विचारधारा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेंगे।

पार्टी से इस्तीफे के बाद एक इंटरव्यू में पूनावाला ने कहा कि राजनीतिक दल आमतौर पर अपने प्रवक्ताओं या कार्यकर्ताओं को नियमित वेतन नहीं देते। ऐसे में उनके लिए रोजमर्रा के खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने कहा कि उन्हें मकान का किराया देना होता है और मकान मालिक यह नहीं देखता कि कोई व्यक्ति किस राजनीतिक पार्टी से जुड़ा है। पूनावाला ने कहा कि राजनीतिक दलों से जुड़े कार्यकर्ताओं को आर्थिक मदद मिलना जरूरी नहीं होता, क्योंकि राजनीति उनके लिए नौकरी नहीं होती। उनके मुताबिक, जब कोई व्यक्ति किसी राजनीतिक आंदोलन या संगठन से जुड़ता है तो वह विचारधारा, व्यक्ति या संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के कारण ऐसा करता है। उन्होंने कहा कि बीजेपी से अलग होने के बाद भी इन तीनों चीजों के प्रति उनका लगाव बना हुआ है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने बीजेपी से कभी अपने जीवन-यापन का खर्च उठाने की उम्मीद नहीं की थी। उनका कहना है कि बीजेपी का काम किसी कार्यकर्ता का गुजारा करना नहीं है। लेकिन व्यावहारिक जीवन में किराया, घरेलू खर्च और दूसरी आर्थिक जिम्मेदारियां पूरी करनी होती हैं। इन्हीं परिस्थितियों ने उन्हें यह फैसला लेने के लिए मजबूर किया। पूनावाला ने खुद को पहली पीढ़ी का राजनेता बताते हुए कहा कि उनके पास कोई राजनीतिक विरासत या पारिवारिक सहारा नहीं है। उन्होंने कहा कि वह उन नेताओं में शामिल नहीं हैं जो राजनीति के जरिए आर्थिक लाभ हासिल करते हैं या किसी राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके मुताबिक, ऐसे लोगों के लिए राजनीति के बाहर अपने जीवन और करियर को संभालना जरूरी हो जाता है।

उन्होंने कहा कि लोग अक्सर यह मान लेते हैं कि हर राजनेता के पास कोई राजनीतिक परिवार या मजबूत आर्थिक बैकग्राउंड होता है। लेकिन उनके जैसे नए दौर के और पहली पीढ़ी के नेताओं की स्थिति अलग है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लोग राजनीतिक विरासत वाले नेताओं और उनके परिवारों को देखने के इतने आदी हो चुके हैं कि उन्हें लगता है कि हर राजनेता की जीवनशैली और परिस्थितियां वैसी ही होंगी।

शहजाद पूनावाला साल 2021 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। इसके बाद वह पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर लगातार टीवी डिबेट और राजनीतिक कार्यक्रमों में बीजेपी का पक्ष रखते रहे। अब उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, पूनावाला ने साफ किया है कि पार्टी से अलग होने का फैसला उनकी विचारधारा में बदलाव नहीं है, बल्कि मुख्य रूप से उनकी निजी और आर्थिक परिस्थितियों से जुड़ा है।

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