विदेशों में IITian का कितना दबदबा? 10 लाख से ज्यादा पूर्व छात्रों का ग्लोबल नेटवर्क, जानें ताकत

Knews Desk– देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IITs सिर्फ इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी की पढ़ाई के लिए ही नहीं, बल्कि अपने मजबूत एलुमनाई नेटवर्क के लिए भी दुनियाभर में जाने जाते हैं. IIT से पढ़ाई करने वाले लोग भारत के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और दुनिया के कई दूसरे देशों में टेक्नोलॉजी, बिजनेस, रिसर्च, फाइनेंस और दूसरे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े पदों पर काम कर रहे हैं. यही वजह है कि IITs का एलुमनाई नेटवर्क देश की सबसे प्रभावशाली पूर्व छात्र नेटवर्क में गिना जाता है.

दरअसल, IITs का एलुमनाई नेटवर्क इन दिनों राजनीतिक चर्चा के बीच भी आया है. RSS प्रमुख मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा पर जाने वाले हैं. इस दौरान उनके प्रवासी भारतीयों से मुलाकात करने का कार्यक्रम है. इसी बीच कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि IITs के डायरेक्टर्स को अपने एलुमनाई को मोहन भागवत से मुलाकात के लिए निर्देशित किया गया है. इस राजनीतिक विवाद के बीच IITs के पूर्व छात्रों के वैश्विक नेटवर्क को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है.दिलचस्प बात यह है कि जयराम रमेश खुद भी IITian हैं. उन्होंने IIT बॉम्बे से बीटेक की पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने अमेरिका के MIT से पोस्ट ग्रेजुएशन किया. ऐसे में IITs के पूर्व छात्रों के प्रभाव और उनके वैश्विक नेटवर्क को समझना और भी दिलचस्प हो जाता है.मौजूदा समय में भारत में कुल 23 IITs संचालित हो रहे हैं. इनमें सबसे पुराना IIT खड़गपुर है, जिसकी शुरुआत आजादी के बाद हुई थी. इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में IITs स्थापित किए गए. 2014 के बाद भी देश में कई नए IIT शुरू हुए. दशकों से इन संस्थानों से हर साल बड़ी संख्या में छात्र ग्रेजुएट होकर निकल रहे हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में करियर बना रहे हैं.

अगर केवल IIT दिल्ली की बात करें तो उसके एलुमनाई नेटवर्क में करीब 65 हजार पूर्व छात्र शामिल बताए जाते हैं. देश के सभी IITs के पूर्व छात्रों को मिलाकर यह संख्या कई लाख तक पहुंचती है और अलग-अलग अनुमानों के अनुसार कुल नेटवर्क 10 लाख से अधिक हो सकता है. हालांकि सभी IITs के लिए एक समान और आधिकारिक संयुक्त संख्या उपलब्ध होना जरूरी नहीं है.विदेशों में भी IITs के पूर्व छात्रों की मौजूदगी काफी मजबूत है. खासकर अमेरिका की सिलिकॉन वैली में IIT से पढ़े भारतीयों की बड़ी संख्या देखने को मिलती है. टेक्नोलॉजी कंपनियों से लेकर स्टार्टअप और रिसर्च संस्थानों तक IIT एलुमनाई महत्वपूर्ण भूमिकाओं में काम कर रहे हैं. गूगल के CEO सुंदर पिचाई जैसे बड़े नाम IIT से निकले ग्लोबल प्रोफेशनल्स की पहचान को मजबूत करते हैं. ब्रिटेन और कनाडा समेत कई अन्य देशों में भी IIT एलुमनाई पेशेवर और कारोबारी क्षेत्रों में सक्रिय हैं.

IITs और उनके एलुमनाई के बीच संबंध सिर्फ पेशेवर नेटवर्क तक सीमित नहीं हैं. विदेशों में रह रहे कई पूर्व छात्र अपने संस्थानों के साथ लगातार जुड़े रहते हैं और शिक्षा, रिसर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर और छात्र सुविधाओं के लिए आर्थिक मदद भी करते हैं. इसी वजह से कई IITs ने पिछले कुछ वर्षों में अपने एलुमनाई फंड को मजबूत किया है.उदाहरण के तौर पर IIT दिल्ली के एलुमनाई से मिलने वाले दान और योगदान से उसका फंड करीब 350 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गया है. दूसरे IITs को भी उनके पूर्व छात्रों से करोड़ों रुपये की मदद मिलती रही है. इससे संस्थानों को रिसर्च, स्कॉलरशिप और कैंपस से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सहायता मिलती है.इस तरह IITs का एलुमनाई नेटवर्क सिर्फ संख्या में बड़ा नहीं है, बल्कि दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पेशेवर पहुंच और प्रभाव के कारण भी खास महत्व रखता है.

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