KNEWS DESK- मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बुधवार को एक अनोखा छात्र प्रदर्शन देखने को मिला। यहां स्कूली छात्र-छात्राएं अपने स्कूल के केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में मर्जर के विरोध में सड़कों पर उतर आए। हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर छात्रों ने स्कूल की मौजूदा पहचान और स्वरूप को बनाए रखने की मांग की। छात्रों ने एनसीईआरटी के फैसले को ‘तुगलकी फरमान’ बताते हुए इसे वापस लेने की अपील की है।
इस प्रदर्शन को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसमें नई पीढ़ी के Gen Alpha के छात्र बड़ी संख्या में नजर आए। छात्रों ने साफ कहा कि अगर उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो उनका शांतिपूर्ण प्रदर्शन आगे बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
आखिर क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं छात्र?
पूरा मामला भोपाल के प्रतिष्ठित डेमॉन्स्ट्रेशन मल्टीपर्पज स्कूल (DMS), जिसे रीजनल स्कूल के नाम से भी जाना जाता है, से जुड़ा है। छात्रों का विरोध स्कूल को केंद्रीय विद्यालय संगठन में मर्ज किए जाने के फैसले को लेकर है। छात्रों का कहना है कि रीजनल स्कूल की अपनी अलग पहचान और शैक्षणिक व्यवस्था है। इसका संचालन लंबे समय से एक विशेष प्रयोगात्मक मॉडल के तौर पर किया जाता रहा है। ऐसे में अगर इसे KVS में मर्ज कर दिया गया तो स्कूल की मौजूदा पहचान और उसका प्रयोगात्मक स्वरूप खत्म हो सकता है।
इसी आशंका को लेकर छात्र-छात्राएं स्कूल के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे। उन्होंने हाथों में बैनर लेकर अपनी मांगें रखीं और स्कूल को मौजूदा स्वरूप में बनाए रखने की अपील की।
1965 से संचालित है रीजनल स्कूल
बताया जाता है कि भोपाल का यह स्कूल दिसंबर 1965 से संचालित हो रहा है। यह सिर्फ सामान्य स्कूल नहीं बल्कि एनसीईआरटी से जुड़ी एक शैक्षणिक प्रयोगशाला के रूप में भी काम करता है। देश में इस तरह के शैक्षणिक प्रयोगात्मक स्कूलों की संख्या सीमित है। भोपाल के अलावा अजमेर, मैसूर और भुवनेश्वर में भी ऐसे संस्थान संचालित किए जाते हैं। छात्रों का तर्क है कि इस विशेष मॉडल की वजह से रीजनल स्कूल की अपनी अलग पहचान बनी हुई है।
छात्रों को डर है कि केंद्रीय विद्यालय संगठन में विलय के बाद स्कूल का प्रयोगात्मक और विशिष्ट स्वरूप प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से वे मर्जर प्रक्रिया को रोकने की मांग कर रहे हैं।
प्रिंसिपल को सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के दौरान छात्र-छात्राओं ने अपनी मांगों को लेकर रीजनल स्कूल के प्रिंसिपल को ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में मर्जर की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और स्कूल के मौजूदा अस्तित्व को बरकरार रखने की मांग की गई है।
छात्रों ने कहा कि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो विरोध को और व्यापक किया जाएगा। फिलहाल छात्रों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना चाहते हैं।
राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा
छात्रों के इस प्रदर्शन ने राजनीतिक हलकों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है। कांग्रेस प्रवक्ता विवेका त्रिपाठी ने इसे भोपाल में Gen Alpha का पहला बड़ा प्रदर्शन बताते हुए छात्रों की मांग का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि छात्र रीजनल स्कूल को केंद्रीय विद्यालय में मर्ज किए जाने का विरोध कर रहे हैं और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए। उनके मुताबिक, छात्रों के हित में सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।
अब आगे क्या?
फिलहाल छात्रों की नजर सरकार और संबंधित विभाग के अगले कदम पर है। प्रदर्शनकारी छात्र चाहते हैं कि रीजनल स्कूल को KVS में मर्ज करने की प्रक्रिया को रोका जाए और इसकी पुरानी पहचान बरकरार रखी जाए।
अब देखना होगा कि छात्रों की मांग पर एनसीईआरटी और सरकार क्या रुख अपनाती है। अगर मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो छात्रों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। इस वजह से भोपाल में Gen Alpha का यह प्रदर्शन आने वाले दिनों में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।