Knews Desk– केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध स्कूलों में पढ़ाई का तरीका अब और ज्यादा डिजिटल होने जा रहा है। CBSE ने अपने संबद्ध स्कूलों में वर्चुअल लैब की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसके जरिए छात्र साइंस और मैथ्स जैसे विषयों के प्रयोग और कठिन कॉन्सेप्ट को डिजिटल माध्यम से बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। खास बात यह है कि छात्रों को वर्चुअल लैब से जुड़ने के लिए अलग से किसी जटिल प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। वे NCERT की किताबों में दिए गए QR कोड को स्कैन करके सीधे डिजिटल कंटेंट तक पहुंच सकेंगे।
हालांकि, CBSE की ओर से स्पष्ट किया गया है कि वर्चुअल लैब स्कूलों में पहले से मौजूद फिजिकल लैब का विकल्प नहीं होंगी। इनका उद्देश्य छात्रों को अतिरिक्त डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि वे कक्षा में पढ़ाए गए विषयों और प्रयोगों को और आसानी से समझ सकें। कई बार किसी प्रयोग को वास्तविक लैब में दोहराना संभव नहीं होता। ऐसे में वर्चुअल लैब छात्रों के लिए सीखने का एक अतिरिक्त माध्यम बन सकती है।
CBSE ने अपने संबद्ध स्कूलों को पाठ्यक्रम आधारित वर्चुअल लैब स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। स्कूल प्रमुखों से कहा गया है कि वे शिक्षकों और छात्रों को इन डिजिटल संसाधनों का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करें। इसका मकसद सिर्फ पढ़ाई को ऑनलाइन करना नहीं है, बल्कि छात्रों को विषयों की व्यावहारिक समझ देना भी है। वर्चुअल लैब की मदद से छात्र किसी प्रयोग की प्रक्रिया को डिजिटल तरीके से देख और समझ सकेंगे।इस पहल के तहत तैयार किया गया डिजिटल कंटेंट केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की पहल के तहत NCERT के सहयोग से तैयार किया गया है। वर्चुअल लैब का कंटेंट NCERT के पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किया गया है। इसमें कक्षा, विषय और चैप्टर के हिसाब से डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इससे छात्रों को अपने पाठ्यक्रम से जुड़ी सामग्री आसानी से मिल सकेगी और वे अपनी पढ़ाई को ज्यादा इंटरैक्टिव बना सकेंगे।
वर्चुअल लैब तक पहुंचने के लिए QR कोड को महत्वपूर्ण माध्यम बनाया गया है। नई शिक्षा नीति के तहत तैयार की गई NCERT की नई किताबों में QR कोड दिए गए हैं। ये कोड किताबों में शुरुआत में उपलब्ध होंगे। छात्र मोबाइल फोन या अन्य डिवाइस से इन QR कोड को स्कैन करके संबंधित डिजिटल कंटेंट और वर्चुअल लैब तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा भारत सरकार के DIKSHA पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से भी डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इस व्यवस्था से खास तौर पर उन छात्रों को फायदा मिल सकता है, जिन्हें किसी वैज्ञानिक प्रयोग या गणितीय अवधारणा को सिर्फ किताबों से समझने में परेशानी होती है। डिजिटल माध्यम से प्रयोग की प्रक्रिया देखने और कॉन्सेप्ट को समझने से उनकी सीखने की क्षमता बेहतर हो सकती है। शिक्षक भी इन संसाधनों का इस्तेमाल कक्षा में किसी टॉपिक को समझाने के लिए कर सकेंगे।CBSE की यह पहल स्कूल शिक्षा में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि, फिजिकल लैब का महत्व पहले की तरह बना रहेगा और वर्चुअल लैब उसका स्थान नहीं लेंगी। बल्कि दोनों माध्यमों को साथ इस्तेमाल करके छात्रों को थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल और डिजिटल अनुभव देने की कोशिश की जाएगी। इससे CBSE स्कूलों में पढ़ाई को ज्यादा आधुनिक, तकनीक आधारित और इंटरैक्टिव बनाने में मदद मिल सकती है।