KNEWS DESK- सावन के बाद शुरू होने वाला भाद्रपद यानी भादो का महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। इस महीने में भगवान श्रीकृष्ण, गणेश जी और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। भादो मास में जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, हरतालिका तीज और अनंत चतुर्दशी जैसे कई बड़े व्रत और त्योहार पड़ते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि साल 2026 में भाद्रपद मास कब से शुरू होगा और कब तक चलेगा।
हिंदू पंचांग में हर महीने का अपना अलग धार्मिक महत्व होता है। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इसके बाद आने वाला भाद्रपद मास भगवान श्रीकृष्ण और गणेश जी की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। सावन के समापन के साथ ही भादो महीने की शुरुआत हो जाएगी।
भाद्रपद को आम बोलचाल में भादो भी कहा जाता है। चातुर्मास के दौरान आने वाले इस महीने में पूजा-पाठ, व्रत, ध्यान, दान और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण त्योहार भी मनाए जाते हैं, जिसकी वजह से भक्तों के लिए यह महीना काफी खास होता है।
कब से शुरू होगा भादो का महीना?
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में सावन का महीना 28 अगस्त को पूर्णिमा तिथि के साथ समाप्त होगा। इसके अगले दिन यानी 29 अगस्त 2026, शनिवार से भाद्रपद मास की शुरुआत होगी। 29 अगस्त को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रहेगी। प्रतिपदा तिथि सुबह 9:57 बजे तक रहने के बाद द्वितीया तिथि शुरू हो जाएगी। इसी के साथ सावन के बाद भादो महीने का शुभारंभ माना जाएगा।
कब खत्म होगा भाद्रपद मास?
भाद्रपद मास करीब एक महीने तक रहने वाला है। पंचांग के अनुसार, 26 सितंबर 2026, शनिवार को भादो महीने का समापन होगा। इस दिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रहेगी, जो देर रात करीब 10:18 बजे तक रहने की बात कही गई है। इसके बाद अगले दिन से आश्विन मास की शुरुआत होगी।
भादो महीने में पड़ेंगे ये प्रमुख त्योहार
भाद्रपद मास को व्रत और त्योहारों से भरपूर महीना माना जाता है। इस दौरान कई प्रमुख धार्मिक पर्व मनाए जाते हैं।
- कजरी तीज।
- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी।
- हरतालिका तीज।
- गणेश चतुर्थी।
- ऋषि पंचमी।
- राधा अष्टमी।
- अनंत चतुर्दशी।
इन पर्वों पर भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।
भाद्रपद मास का धार्मिक महत्व
भादो का महीना चातुर्मास के महत्वपूर्ण महीनों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान व्यक्ति को अपने खान-पान और दैनिक जीवन में सात्विकता और संयम बनाए रखना चाहिए। इस महीने में भगवान श्रीकृष्ण और गणेश जी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। भक्त मंदिरों में दर्शन करने के साथ ही घर पर भी पूजा-पाठ और मंत्र जाप करते हैं।
भादो में दान-पुण्य करना माना जाता है शुभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद मास में जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और अपनी क्षमता के अनुसार अन्य वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। पवित्र नदियों में स्नान, ध्यान और धार्मिक कार्यों को भी पुण्यदायी माना गया है। कहा जाता है कि इस महीने में व्यक्ति को अधिक से अधिक समय धार्मिक और सकारात्मक कार्यों में लगाना चाहिए। साथ ही अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत और पूजा का पालन करना चाहिए।
भादो के बाद शुरू होगा पितृ पक्ष
भाद्रपद पूर्णिमा के बाद पितरों को समर्पित पितृ पक्ष की शुरुआत होती है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं और उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कर्म करते हैं। इस तरह भाद्रपद मास धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। एक ओर जहां इस महीने में श्रीकृष्ण और गणेश जी की आराधना होती है, वहीं महीने के समापन के बाद पितरों को समर्पित पितृ पक्ष की शुरुआत हो जाती है।