सांस लेने में परेशानी के बाद बिगड़ी थी कमलेश कोल की हालत, परिजनों का आरोप- 108 पर लगातार फोन के बावजूद दो घंटे तक नहीं पहुंची एंबुलेंस
Knews Desk- मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। रीवा जिले में समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए एक सरकारी शिक्षक के परिजनों ने गंभीर लापरवाही का दावा किया है। गंगेव जनपद पंचायत के बुड़वा गांव निवासी शिक्षक कमलेश कोल की तबीयत रविवार को अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें सांस लेने में काफी परेशानी हो रही थी।
परिजनों के मुताबिक, कमलेश की हालत लगातार खराब होती देख उन्होंने तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा को फोन किया। परिवार का आरोप है कि कई बार संपर्क करने के बाद भी करीब दो घंटे तक एंबुलेंस गांव नहीं पहुंची। इस दौरान शिक्षक की हालत और गंभीर होती चली गई।
अस्पताल पहुंचने से पहले बिगड़ी हालत
एंबुलेंस का इंतजार लंबा होता देख परिजन किसी तरह कमलेश को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मनगवां पहुंचे। हालांकि, अस्पताल पहुंचने तक उनकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। मनगवां स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी के मुताबिक, मरीज को जब अस्पताल लाया गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
कमलेश की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा है। परिजनों का कहना है कि अगर एंबुलेंस समय पर पहुंच जाती और शिक्षक को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल जाती, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। परिवार ने एंबुलेंस सेवा में कथित देरी की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों में भी नाराजगी
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी आक्रोश है। ग्रामीणों का सवाल है कि आपातकालीन सेवा के लिए कॉल किए जाने के बावजूद एंबुलेंस को गांव तक पहुंचने में इतना समय क्यों लगा। उनका कहना है कि गंभीर मरीजों के मामले में कुछ मिनटों की देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है।
फिलहाल, एंबुलेंस पहुंचने में देरी की वास्तविक वजह क्या थी, यह स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।