KNEWS DESK- इस साल नाग पंचमी 17 अगस्त, सोमवार को मनाई जा रही है। खास बात यह है कि नाग पंचमी और सावन का तीसरा सोमवार एक ही दिन पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन नाग देवता की पूजा के साथ कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाता है। इन्हीं में से एक मान्यता तवे और लोहे की कढ़ाई के इस्तेमाल से जुड़ी है।
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सावन में पड़ने वाली नाग पंचमी का भी हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है और उनसे सुख-समृद्धि तथा परिवार की रक्षा की कामना की जाती है।
इस साल नाग पंचमी 17 अगस्त 2026, सोमवार को पड़ रही है। सोमवार और नाग पंचमी के एक साथ आने से इस दिन का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है। देश के अलग-अलग हिस्सों में नाग पंचमी को लेकर अलग-अलग परंपराएं निभाई जाती हैं। कई परिवारों में इस दिन तवे और लोहे की कढ़ाई को चूल्हे पर रखने से परहेज किया जाता है। आइए जानते हैं इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है।
नाग पंचमी पर तवा क्यों नहीं चढ़ाते?
धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय परंपराओं में लोहे के तवे का संबंध राहु ग्रह से जोड़ा जाता है। वहीं, रसोई की अग्नि को मंगल से संबंधित माना जाता है। इसी वजह से कुछ परिवार नाग पंचमी के दिन लोहे के तवे या कढ़ाई को तेज आग पर रखने से बचते हैं। मान्यता है कि नाग पंचमी नाग देवता की पूजा का पर्व है और ज्योतिष में राहु-केतु का संबंध सर्प से जोड़ा जाता है। इसलिए इस दिन राहु से संबंधित माने जाने वाले लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल न करने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है।
हालांकि, यह धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि तवा या कढ़ाई इस्तेमाल करने से राहु-केतु का प्रभाव बढ़ता है।
तवे को नाग के फन से जोड़ने की क्या मान्यता है?
कुछ लोक मान्यताओं में गोल और चपटे तवे को नाग के फन का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से नाग पंचमी के दिन तवे पर रोटी बनाने से बचने की परंपरा बताई जाती है। कुछ जगहों पर इस दिन पहले से तैयार भोजन खाने की परंपरा भी है। वहीं कई परिवार रोटी की जगह पूरी, पुए, कचौड़ी या खीर जैसी चीजें बनाते हैं।
राहु-केतु और कालसर्प दोष का कनेक्शन
ज्योतिषीय मान्यताओं में नाग पंचमी को राहु-केतु और कालसर्प दोष से भी जोड़ा जाता है। ऐसी मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने से राहु-केतु से जुड़े अशुभ प्रभावों को शांत करने की प्रार्थना की जा सकती है। इसी विश्वास के चलते कई लोग नाग पंचमी पर विशेष पूजा-पाठ करते हैं और लोहे से जुड़ी कुछ वस्तुओं के इस्तेमाल से दूरी बनाते हैं।
नाग पंचमी पर किन चीजों से बचने की मान्यता है?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार कुछ परिवार नाग पंचमी के दिन निम्न चीजों से परहेज करते हैं।
- लोहे के तवे पर रोटी बनाने से बचते हैं।
- लोहे की कढ़ाई को चूल्हे पर नहीं चढ़ाते।
- कुछ जगहों पर चाकू, सुई जैसी धारदार वस्तुओं के इस्तेमाल से भी बचने की परंपरा है।
- नाग देवता को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि से दूर रहने की मान्यता है।
- कई परिवार इस दिन भोजन पहले से तैयार करके रखते हैं।
नाग पंचमी पर क्या बनाया जा सकता है?
नाग पंचमी पर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरह के पकवान बनाए जाते हैं। जिन परिवारों में तवे का इस्तेमाल न करने की परंपरा है, वहां पूरी, पुए, कचौड़ी, खीर और अन्य पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं। कुछ धार्मिक परंपराओं में मिट्टी, तांबे या पीतल के बर्तनों के इस्तेमाल को भी उचित माना गया है। नाग देवता की पूजा के बाद श्रद्धानुसार दान-पुण्य करने की भी परंपरा है।
क्या तवा इस्तेमाल करने से राहु-केतु का प्रभाव बढ़ता है?
तवा इस्तेमाल करने से राहु-केतु का प्रभाव बढ़ने की बात ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यता पर आधारित है, इसे वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जा सकता। इसलिए नाग पंचमी पर तवा न इस्तेमाल करना पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था और पारिवारिक परंपरा का विषय है।
अगर आपके परिवार में इस परंपरा का पालन किया जाता है तो आप पहले से भोजन तैयार कर सकते हैं या अपनी पारंपरिक मान्यता के अनुसार वैकल्पिक बर्तन और पकवान इस्तेमाल कर सकते हैं।