KNEWS DESK- युवाओं में तेजी से बढ़ रही वेपिंग को अक्सर सामान्य सिगरेट से कम नुकसानदायक माना जाता है। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक ई-सिगरेट को सुरक्षित विकल्प समझना सही नहीं है। इसके लंबे समय तक इस्तेमाल से होने वाले नुकसान पर अभी शोध जारी है।

ई-सिगरेट और वेपिंग का चलन खासकर युवाओं के बीच तेजी से बढ़ा है। कई लोग इसे सामान्य सिगरेट का सुरक्षित विकल्प मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसका इस्तेमाल धूम्रपान छोड़ने के लिए भी करते हैं। लेकिन ई-सिगरेट को पूरी तरह सुरक्षित मानना सही नहीं है। इसके एयरोसोल में निकोटीन के अलावा कई तरह के रसायन और अन्य पदार्थ हो सकते हैं, जिनका फेफड़ों पर असर पड़ सकता है।
क्या ई-सिगरेट से लंग्स कैंसर हो सकता है?
इस सवाल का सीधा जवाब फिलहाल पूरी तरह स्थापित नहीं है। सामान्य सिगरेट और फेफड़ों के कैंसर के बीच संबंध लंबे समय से साबित है, लेकिन ई-सिगरेट के लंबे समय तक इस्तेमाल और कैंसर के बीच संबंध को समझने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है।
हालांकि, 2026 में IARC ने एक नए अध्ययन पर चर्चा करते हुए बताया कि पहले सिगरेट पी चुके लोगों में धूम्रपान छोड़ने के बाद भी ई-सिगरेट का इस्तेमाल फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को कम होने से रोक सकता है। विशेषज्ञों ने इसके साथ ही इस क्षेत्र में मौजूद रिसर्च गैप को भी रेखांकित किया है।
वेपिंग से फेफड़ों को क्या नुकसान हो सकता है?
ई-सिगरेट के इस्तेमाल को फेफड़ों से जुड़ी कई समस्याओं से जोड़ा गया है। रिसर्च में वेपिंग करने वाले लोगों में खांसी, बलगम, सांस फूलने और घरघराहट जैसे श्वसन संबंधी लक्षणों का संबंध सामने आया है। कुछ मामलों में वेपिंग से EVALI (E-cigarette or Vaping Product Use-Associated Lung Injury) जैसी गंभीर फेफड़ों की बीमारी भी सामने आई है। इसमें फेफड़ों में गंभीर चोट और सूजन हो सकती है और कुछ मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है।
ई-सिगरेट में मौजूद रसायन भी चिंता की वजह
ई-सिगरेट के तरल में आम तौर पर निकोटीन, फ्लेवरिंग और प्रोपिलीन ग्लाइकोल या वेजिटेबल ग्लिसरीन जैसे पदार्थ इस्तेमाल किए जाते हैं। गर्म होने के बाद इनसे बनने वाला एयरोसोल फेफड़ों तक पहुंचता है। समस्या यह है कि अलग-अलग उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों और उनकी मात्रा में काफी अंतर हो सकता है। इसलिए किसी भी ई-सिगरेट या वेपिंग प्रोडक्ट को सिर्फ इसलिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता क्योंकि उसमें सामान्य सिगरेट का धुआं नहीं होता।
सिगरेट के साथ वेपिंग करना और ज्यादा चिंता की बात
कई लोग सामान्य सिगरेट पूरी तरह छोड़ने के बजाय ई-सिगरेट को उसके साथ इस्तेमाल करते हैं। इसे ड्यूल यूज कहा जाता है। ऐसे में व्यक्ति निकोटीन के संपर्क में बना रहता है और दोनों तरह के उत्पादों से जुड़े नुकसान का सामना कर सकता है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति सिगरेट छोड़ना चाहता है, तो सिर्फ ई-सिगरेट शुरू कर देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं माना जाना चाहिए। रिसर्च में ई-सिगरेट के जरिए निकोटीन निर्भरता पूरी तरह खत्म होने को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।
युवाओं के लिए क्यों ज्यादा चिंता?
ई-सिगरेट में मौजूद निकोटीन बेहद नशीला पदार्थ है। युवाओं में इसका इस्तेमाल निकोटीन पर निर्भरता बढ़ा सकता है। इसके अलावा, वेपिंग के लंबे समय तक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर अभी भी कई सवालों के जवाब स्पष्ट नहीं हैं।
क्या ई-सिगरेट को सुरक्षित मानना सही है?
नहीं यह कहना जल्दबाजी होगी कि ई-सिगरेट सीधे तौर पर सामान्य सिगरेट जितना ही कैंसर पैदा करती है, क्योंकि इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर अभी पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं है। लेकिन मौजूदा सबूत यह भी नहीं बताते कि वेपिंग पूरी तरह सुरक्षित है।
खासकर ऐसे लोगों के लिए जो पहले कभी धूम्रपान नहीं करते थे, केवल ट्रेंड या दोस्तों के दबाव में वेपिंग शुरू करना स्वास्थ्य के लिहाज से जोखिम भरा फैसला हो सकता है। और जो लोग पहले से सिगरेट पीते हैं, उनके लिए सिगरेट और ई-सिगरेट दोनों साथ इस्तेमाल करना जोखिम कम करने का भरोसेमंद तरीका नहीं माना जा सकता।