बिलावल का इमरान को साथ आने का न्योता, नकवी के निशाने पर सरकार… पाकिस्तान में फिर बदल रहे सियासी समीकरण?

Knews Desk- पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पीओके में जारी तनाव के बीच सत्तारूढ़ खेमे के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। एक तरफ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को साथ आने का प्रस्ताव दिया है, तो दूसरी तरफ गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बयानों ने नवाज शरीफ के खेमे की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नकवी को सेना प्रमुख आसिम मुनीर का करीबी माना जाता है, इसलिए उनके बयानों के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीओके के हालात और मोहसिन नकवी के हालिया बयानों को लेकर पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के भीतर असहजता बढ़ी है। नवाज शरीफ ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर उन्हें नकवी के बयान पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने से बचने की सलाह दी है।

बताया जा रहा है कि नवाज शरीफ ने पार्टी नेताओं से कहा है कि इस मुद्दे पर फिलहाल कोई व्यक्तिगत बयान न दिया जाए और पार्टी की तरफ से सोच-समझकर आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी की जाए।

इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी सवाल उठाया था कि अगर किसी को लगता है कि मौजूदा व्यवस्था पूरी तरह नाकाम हो चुकी है, तो वह खुद उसी व्यवस्था का हिस्सा क्यों बना हुआ है।

बिलावल ने इमरान खान की तरफ बढ़ाया हाथ

पाकिस्तान में बदलते सियासी समीकरणों का पहला बड़ा संकेत बिलावल भुट्टो के बयान से मिला। पीओके में चुनाव प्रचार के दौरान बिलावल ने इमरान खान और उनकी पार्टी को साथ आने का न्योता दिया।

बिलावल का कहना था कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने के लिए विपक्षी ताकतों को साथ आने की जरूरत है। उन्होंने संकेत दिया कि पीओके चुनाव के बाद मौजूदा सरकार के खिलाफ राजनीतिक अभियान शुरू किया जा सकता है और इसमें वह इमरान खान का समर्थन चाहते हैं।

अगर बिलावल और इमरान का खेमा किसी साझा रणनीति पर पहुंचता है तो यह पाकिस्तान की मौजूदा सत्ता के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकती है।

मोहसिन नकवी ने व्यवस्था पर उठाए सवाल

बिलावल के बयान के कुछ ही दिन बाद पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने देश की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तीखे सवाल खड़े कर दिए। नकवी का कहना है कि मजबूत प्रशासनिक ढांचा तैयार किए बिना पाकिस्तान की स्थिति में सुधार मुश्किल है।

उन्होंने देश में प्रशासनिक सुधारों की जरूरत बताते हुए पाकिस्तान को अधिक प्रांतों में बांटने जैसे प्रस्ताव का भी समर्थन किया। उनके इस बयान के बाद सियासी बहस और तेज हो गई।

नकवी के बयान पर सेना का रुख भी चर्चा में

मोहसिन नकवी के बयान पर पाकिस्तानी सेना से सवाल किया गया तो सैन्य प्रवक्ता ने भी बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और जरूरी सुधारों पर विचार करने की जरूरत की बात कही।

यही वजह है कि नकवी के बयान को केवल एक मंत्री की व्यक्तिगत राय के तौर पर नहीं देखा जा रहा। नकवी को सेना प्रमुख आसिम मुनीर के करीब माना जाता है, इसलिए पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पर्दे के पीछे किसी नए राजनीतिक समीकरण की जमीन तैयार की जा रही है।

हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि सेना सीधे तौर पर किसी सत्ता परिवर्तन की रणनीति पर काम कर रही है। लेकिन बिलावल का इमरान की तरफ हाथ बढ़ाना, नकवी का मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाना और सेना की ओर से प्रशासनिक सुधारों की बात करना पाकिस्तान की राजनीति में बढ़ती खींचतान की ओर जरूर इशारा करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *