Knews Desk- अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब ऐसे दौर में पहुंच गया है, जहां वॉशिंगटन कथित तौर पर सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। ईरान पर किए गए हवाई हमलों से अपेक्षित नतीजे नहीं मिलने के बाद अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान नए और गैर-परंपरागत तरीकों की तलाश में जुटा है। इनमें साइबर ऑपरेशन, आर्थिक दबाव और ईरान के भीतर मौजूद असंतोष जैसे विकल्पों पर चर्चा हो सकती है।
CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) से जुड़े एक खुफिया अधिकारी ने सैन्य विश्लेषकों के एक समूह को ईमेल भेजकर ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए नए और रचनात्मक सुझाव मांगे हैं। सैन्य रणनीति को लेकर इस तरह बड़े स्तर पर विशेषज्ञों से विचार मांगना सामान्य प्रक्रिया से अलग माना जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ऐसे विकल्प तलाश रहा है जिनसे ईरान पर दबाव बनाया जा सके, लेकिन बड़े पैमाने पर जमीनी सैन्य अभियान शुरू करने की जरूरत न पड़े।
हवाई हमलों से क्यों नहीं बन रही बात?
ईरान की भौगोलिक स्थिति और उसके महत्वपूर्ण सैन्य एवं परमाणु ठिकानों की संरचना अमेरिका के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। फोर्डो और नतान्ज़ जैसे कई संवेदनशील परमाणु ठिकानों का बड़ा हिस्सा जमीन या पहाड़ों के भीतर स्थित है। ऐसे ठिकानों को केवल हवाई हमलों के जरिए पूरी तरह निष्क्रिय करना आसान नहीं माना जाता।
इसके अलावा सैन्य दबाव के बावजूद ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के रुख में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है। ऐसे में लंबे समय तक हवाई अभियान जारी रखना अमेरिका के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों स्तर पर मुश्किलें बढ़ा सकता है।
जमीनी युद्ध से क्यों बचना चाहता है अमेरिका?
ईरान में अमेरिकी जमीनी सेना उतारने का विकल्प बेहद जोखिम भरा माना जा रहा है। ईरान का विशाल और कठिन भूभाग किसी भी जमीनी अभियान को लंबा और महंगा बना सकता है। अमेरिका पहले ही इराक और अफगानिस्तान में लंबे सैन्य अभियानों का अनुभव कर चुका है।
मौजूदा संघर्ष को लेकर रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी सेना को भी नुकसान उठाना पड़ा है। यही वजह है कि वॉशिंगटन ऐसा रास्ता तलाश रहा है जिससे अपने रणनीतिक लक्ष्य हासिल किए जा सकें, लेकिन बड़े जमीनी युद्ध से बचा जा सके।
ट्रंप के सामने राजनीतिक चुनौती
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ईरान संकट सैन्य चुनौती के साथ राजनीतिक परीक्षा भी है। ट्रंप लंबे समय से अमेरिका को विदेशों में चलने वाले लंबे युद्धों से दूर रखने की बात करते रहे हैं।
दूसरी ओर अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगाने और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तेहरान पर दबाव बनाए रखना चाहता है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन के सामने सवाल है कि बिना बड़े जमीनी अभियान के ईरान पर प्रभावी दबाव कैसे बनाया जाए।
किन विकल्पों पर हो सकता है विचार?
रिपोर्टों और विशेषज्ञों की राय के आधार पर अमेरिका साइबर ऑपरेशन के जरिए ईरान के रणनीतिक नेटवर्क और महत्वपूर्ण ढांचे पर दबाव बढ़ाने जैसे विकल्पों पर विचार कर सकता है। हालांकि ऐसे कदमों के गंभीर क्षेत्रीय और मानवीय परिणाम भी हो सकते हैं।
इसके अलावा ईरान की कमजोर आर्थिक स्थिति और घरेलू असंतोष भी अमेरिकी रणनीतिक आकलन का हिस्सा हो सकता है। महंगाई और आर्थिक परेशानियों को लेकर ईरान में पहले भी विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं।
तीसरा बड़ा विकल्प आर्थिक प्रतिबंधों को और कड़ा करना हो सकता है। इसका मकसद ईरान की आय और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संसाधनों तक पहुंच सीमित कर सरकार पर दबाव बढ़ाना होगा।
फिलहाल अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह ईरान पर दबाव बनाए रखे, लेकिन संघर्ष को ऐसे लंबे युद्ध में बदलने से रोके जिसमें बड़े पैमाने पर अमेरिकी सैनिकों की तैनाती करनी पड़े