KNEWS DESK – केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इस फैसले को सरकार की नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनता और छात्रों के दबाव का नतीजा बताया। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से लेकर पवन खेड़ा और अधीर रंजन चौधरी तक कई नेताओं ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाबदेही तय करने की मांग की।
इस्तीफे की घोषणा के तुरंत बाद कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए लिखा, “नरेंद्र मोदी भारत का अतीत हैं। अतीत कभी भविष्य से नहीं लड़ सकता।” पार्टी ने इस फैसले को छात्रों के आंदोलन की जीत बताया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि देश के छात्रों और युवाओं के संघर्ष की जीत है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि छात्रों की आवाज आखिरकार सत्ता तक पहुंची और यह मोदी सरकार के हठ की हार है। खड़गे ने कहा कि अब प्रधानमंत्री को देश के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए और छात्र आंदोलन के दौरान बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह फैसला बहुत देर से लिया गया है। उन्होंने इसे अधूरा कदम बताते हुए कहा कि आखिरकार देश को इस विवाद से राहत मिली है और इसके लिए देशवासियों को बधाई दी जानी चाहिए।
वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यदि सरकार पहले ही यह फैसला ले लेती तो हाल के दिनों में हुई अप्रिय घटनाओं से बचा जा सकता था। उनके अनुसार, छात्र आंदोलन के दौरान हुई सख्ती, लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य कार्रवाई की नौबत नहीं आती। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बढ़ते दबाव और राजनीतिक संकट के कारण अपने ही मंत्री का इस्तीफा लेने को मजबूर हुई।
दूसरी ओर, धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपे अपने इस्तीफे में कहा कि यह मामला उनके लिए किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं था। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले कुछ दिनों में सामने आए घटनाक्रमों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया है और इसी कारण उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।
हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल इस्तीफा देने से विवाद खत्म नहीं होगा। कांग्रेस का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में सामने आई खामियों और छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना होगा। पार्टी का कहना है कि युवाओं का भरोसा बहाल करने के लिए सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार जरूरी है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर आगे क्या कदम उठाती है और छात्रों की लंबित मांगों पर उसका रुख क्या रहता है।