रोजगार और भर्ती को लेकर लखनऊ में प्रदर्शन, मायावती आवास पहुंचे 69 हजार शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी

KNEWS DESK- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज युवाओं से जुड़े दो बड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। एक तरफ 69 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थी बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती के आवास का घेराव कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नीट पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आजाद समाज पार्टी भी विरोध प्रदर्शन कर रही है।

लखनऊ की सड़कों पर चल रहे इन दोनों आंदोलनों के मुद्दे भले ही अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों का केंद्र युवाओं का भविष्य, रोजगार और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता है। प्रदर्शनकारी लंबे समय से सरकारी भर्तियों और परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं। 69 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से सरकार के दरवाजे खटखटा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला है। अभ्यर्थियों ने कहा कि जब उनकी सुनवाई सरकार के स्तर पर नहीं हुई तो अब वे अपनी बात बसपा प्रमुख मायावती तक पहुंचाने आए हैं। उनका कहना है कि मायावती पिछड़े और दलित वर्ग के अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने में उनकी मदद करें।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष अभ्यर्थी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने मायावती के आवास के बाहर पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई। इस दौरान पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने मौके से हटाया और कुछ को उठाकर वहां से ले जाया गया।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया कई वर्षों से विवादों में फंसी हुई है और कानूनी लड़ाई के कारण हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि वे लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। वहीं, दूसरी ओर आजाद समाज पार्टी ने भी नीट-यूजी पेपर लीक और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर प्रदर्शन किया। पार्टी का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि लाखों छात्रों का भविष्य इन परीक्षाओं पर निर्भर करता है।

इस पूरे मामले पर बसपा प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने नीट-यूजी समेत विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक और उससे जुड़े मामलों पर चिंता जताई। मायावती ने कहा कि छात्रों और युवाओं के आंदोलन को समाज के कई वर्गों का समर्थन मिल रहा है। मायावती ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ रही राजनीतिक खींचतान पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच शिक्षा व्यवस्था में सुधार का मूल मुद्दा पीछे नहीं छूटना चाहिए।

उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में केवल राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। फिलहाल लखनऊ में युवाओं के दोनों प्रदर्शन जारी हैं। एक ओर शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी अपने अधिकारों और न्याय की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर विरोध की आवाजें उठ रही हैं। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *