बीजेपी सांसद ने कहा- सरकार बातचीत के लिए तैयार थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने अपना वादा पूरा नहीं किया; NEET पेपर लीक मामले में कार्रवाई का भी दिया ब्यौरा
Knews Desk- NEET पेपर लीक मामले को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए तैयार थी और उनकी समस्याओं को सुनना चाहती थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों की ओर से सहयोग नहीं किया गया।
बांसुरी स्वराज ने दावा किया कि जब प्रदर्शनकारी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मिलने पहुंचे थे, तब उनके पास अपनी मांगों की लिखित सूची नहीं थी। उन्होंने कहा कि नड्डा ने उनसे अपनी मांगें लिखित रूप में देने को कहा, लेकिन इसे तैयार करने में करीब ढाई घंटे लग गए।
बीजेपी सांसद ने कहा कि बैठक के दौरान सरकार की ओर से साफ किया गया था कि बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन खत्म करने की अपील भी की थी। बांसुरी स्वराज के मुताबिक, उस समय प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन रोकने का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में वे अपने वादे से पीछे हट गए।
‘गलत दावे कर माहौल खराब करने की कोशिश’
बांसुरी स्वराज ने प्रदर्शन के दौरान लगाए गए कुछ आरोपों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान कई ऐसी बातें सामने आईं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने 12 साल की बच्ची के घायल होने के दावे को भी गलत बताया और कहा कि इस तरह की खबरों से भ्रम फैलाने की कोशिश की गई।
NEET मामले में सरकार की कार्रवाई गिनाई
दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान बांसुरी स्वराज ने NEET पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवाओं को देश का भविष्य और राष्ट्र निर्माण की ताकत मानते हैं, इसलिए छात्रों के हित सरकार की प्राथमिकता हैं।
उन्होंने बताया कि NEET परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी और 11 मई को गड़बड़ी की जानकारी सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने तुरंत FIR दर्ज कराई। इसके बाद मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई।
बांसुरी स्वराज ने कहा कि CBI ने जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया और मामले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और प्रभावित छात्रों को न्याय मिले।