22 दिन से जारी भूख हड़ताल के बीच दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला, केंद्र बोला- निजी अस्पताल में भर्ती कराने पर कोई आपत्ति नहीं, लेकिन डॉक्टरों की सलाह के बिना नहीं मिलेगी छुट्टी
Knews Desk- दिल्ली हाईकोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल से निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति दे दी है। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह आदेश दिया। इससे पहले सफदरजंग अस्पताल से स्थानांतरण की मांग को मंजूरी नहीं मिली थी, जिसे चुनौती दी गई थी।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, सरकार ने शर्त रखी कि वांगचुक को लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाए और डॉक्टरों की सलाह के बिना उन्हें अस्पताल से छुट्टी न दी जाए।
कोर्ट ने मेडिकल रिकॉर्ड के साथ शिफ्ट करने का दिया निर्देश
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट में कहा कि वांगचुक की हालत को देखते हुए उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में होना जरूरी है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें अस्पताल में भर्ती रखा जाए और मेडिकल सलाह के बाद ही आगे का फैसला लिया जाए।
इसके बाद कोर्ट ने निर्देश दिया कि सोनम वांगचुक को उनके सभी मेडिकल रिकॉर्ड के साथ सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि इलाज के दौरान उनकी पत्नी उनसे मुलाकात कर सकती हैं।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर हैं वांगचुक
बता दें कि सोनम वांगचुक पिछले 22 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। वह कथित नीट पेपर लीक मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वांगचुक का कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक वह अपना अनशन खत्म नहीं करेंगे।
पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से अस्पताल पहुंचाया था
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे। 18 जुलाई को पुलिस उन्हें प्रदर्शन स्थल से लेकर सफदरजंग अस्पताल पहुंची थी, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें निजी अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा।