शरद पवार और अजित पवार गुटों के बीच विलय की संभावनाओं के साथ NDA में एंट्री को लेकर भी चर्चा जारी है। हालांकि, नेतृत्व और संगठन पर नियंत्रण को लेकर सहमति नहीं बन पाने से दोनों गुटों के एक साथ आने की राह मुश्किल नजर आ रही है।
Knews Desk- महाराष्ट्र की सियासत में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को लेकर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार गुट के NDA में शामिल होने और दोनों NCP गुटों के संभावित विलय को लेकर अंदरखाने बातचीत चल रही है। हालांकि, फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती दोनों खेमों के बीच नेतृत्व को लेकर सहमति बनाना है।
बताया जा रहा है कि अजित पवार गुट की ओर से सुनेत्रा पवार और सुप्रिया सुले के बीच तालमेल को लेकर मतभेद बने हुए हैं। सुनेत्रा पवार खेमा तुरंत विलय के पक्ष में नहीं है। उनकी चिंता है कि अगर दोनों गुट एक हो जाते हैं तो पार्टी संगठन और फैसलों पर धीरे-धीरे सुप्रिया सुले का प्रभाव बढ़ सकता है।
नेतृत्व और संगठन को लेकर मतभेद
सूत्रों के अनुसार, अजित पवार गुट के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आ रही है। एक ओर सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार का खेमा सक्रिय बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल जैसे नेता अलग रणनीति पर काम कर रहे हैं।
कहा जा रहा है कि सुनेत्रा पवार चाहती हैं कि महाराष्ट्र में पार्टी की कमान और संगठन से जुड़े अहम फैसलों में उनकी भूमिका मजबूत रहे। इसके अलावा सरकार में मंत्रालयों के बंटवारे और संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर भी उनकी कुछ मांगें हैं। इन्हीं मुद्दों पर सहमति नहीं बनने से विलय की बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है।
NDA में अलग एंट्री का विकल्प
विलय के अलावा एक दूसरा रास्ता भी चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक, अगर संसद में परिसीमन विधेयक आता है तो शरद पवार गुट कुछ शर्तों के साथ उसका समर्थन कर सकता है। इसके बाद संसद सत्र खत्म होने के बाद NCP (शरद पवार) को NDA में एक अलग सहयोगी दल के रूप में शामिल किया जा सकता है।
इस रणनीति के तहत पहले मुद्दों पर समर्थन और बाद में गठबंधन की औपचारिक घोषणा का रास्ता अपनाया जा सकता है। हालांकि, इस पर दोनों गुटों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
परिसीमन बिल पर NCP-SP का रुख
NCP (शरद पवार) के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने परिसीमन विधेयक को लेकर पार्टी का रुख साफ किया है। उन्होंने कहा कि अगर यह बिल महिला आरक्षण और महिलाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए लाया जाता है और इसमें राजनीतिक फायदे की मंशा नहीं होती, तो पार्टी इस पर विचार कर सकती है।
उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले लेंगी, लेकिन उससे पहले संगठन के भीतर चर्चा होगी और सामूहिक निर्णय के बाद ही रुख तय किया जाएगा।
शिंदे गुट ने भी दिए संकेत
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता संजय शिरसाट ने कहा कि फिलहाल दोनों NCP गुटों के एक साथ विलय की संभावना कम नजर आ रही है। उन्होंने दावा किया कि दोनों पक्षों की शर्तें अलग-अलग हैं और उनमें सहमति बनना आसान नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर शरद पवार गुट NDA में आता है तो वह अलग तरीके से शामिल हो सकता है, लेकिन दोनों गुटों का एक साथ आना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
सुप्रिया सुले ने विलय की चर्चाओं को नकारा
वहीं, NCP (शरद पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने भी साफ किया है कि फिलहाल विलय को लेकर कोई बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने कहा कि अजित पवार के निधन से पहले दोनों गुटों के बीच विलय को लेकर चर्चा हुई थी और अगर वह कुछ समय और रहते तो शायद इस पर फैसला हो सकता था।
महाराष्ट्र की राजनीति में अब नजर इस बात पर है कि शरद पवार गुट NDA का हिस्सा किस रूप में बनता है। क्या दोनों NCP गुटों का साथ आएंगे या फिर अलग-अलग रास्तों से सत्ता गठबंधन तक पहुंचेंगे, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।