चीन की PL-15 को टक्कर दे रही भारत की ‘अस्त्र’ मिसाइल, 6 देशों ने दिखाई खरीद में दिलचस्पी

ऑपरेशन सिंदूर में प्रदर्शन के बाद बढ़ी मांग, लंबी रेंज और कम कीमत बनी सबसे बड़ी ताकत; भारत का रक्षा निर्यात नए स्तर पर पहुंचने की तैयारी में

Knews Desk- भारत की स्वदेशी ‘अस्त्र’ बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) एयर-टू-एयर मिसाइल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। भारतीय वायु सेना में शामिल इस मिसाइल की क्षमता से प्रभावित होकर दुनिया के कई देश इसे अपने रक्षा बेड़े में शामिल करने में रुचि दिखा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 6 देशों ने अस्त्र मिसाइल खरीदने के लिए भारत से संपर्क किया है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अस्त्र मिसाइल की प्रभावशीलता सामने आने के बाद इसकी मांग में तेजी आई है। सूत्रों के अनुसार, भारत ने हाल ही में इंडोनेशिया के साथ इस मिसाइल को लेकर बातचीत आगे बढ़ाई है। वहीं, आर्मेनिया और सऊदी अरब समेत कई अन्य देश भी इसे अपनी वायु सेनाओं में शामिल करने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।

कई देशों की नजर भारत की स्वदेशी ताकत पर

आर्मेनिया पहले ही भारत से आकाश मिसाइल सिस्टम, पिनाका रॉकेट सिस्टम और स्वाति रडार जैसे रक्षा उपकरण खरीद चुका है। अब वह अपने Su-30SM लड़ाकू विमानों में अस्त्र मिसाइल को शामिल करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ रहा है।

वहीं, सऊदी अरब भी अपनी रॉयल एयर फोर्स के F-15 और यूरोफाइटर टाइफून लड़ाकू विमानों के साथ अस्त्र मिसाइल के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भारत से बातचीत कर रहा है।

चीन की PL-15 को चुनौती दे रही अस्त्र

अस्त्र मिसाइल को चीन की PL-15 मिसाइल का मजबूत विकल्प माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत, तेज रफ्तार और आधुनिक तकनीक है।

यह मिसाइल करीब Mach 4.5 की रफ्तार से लक्ष्य को भेद सकती है और इसकी शुरुआती रेंज लगभग 80 से 110 किलोमीटर तक बताई जाती है। वहीं, अस्त्र के MK-2 वर्जन का सफल परीक्षण हो चुका है, जिसकी मारक क्षमता करीब 240 किलोमीटर तक है। भविष्य में इसके MK-3 संस्करण पर काम किया जा रहा है, जिसकी रेंज 300 किलोमीटर से ज्यादा होने की उम्मीद है।

बढ़ेगा उत्पादन, निजी कंपनियों को भी मिलेगा मौका

अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने के साथ भारत सरकार ने अस्त्र मिसाइल के उत्पादन को तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। अभी तक इसका निर्माण मुख्य रूप से भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) द्वारा किया जा रहा था, लेकिन अब निजी क्षेत्र को भी उत्पादन प्रक्रिया में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है।

इस कदम से न केवल भारतीय वायु सेना की जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि विदेशी देशों से मिलने वाले संभावित रक्षा सौदों को भी समय पर पूरा किया जा सकेगा।

भारत की अस्त्र मिसाइल को रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। यह उपलब्धि वैश्विक हथियार बाजार में भारत की बढ़ती ताकत और स्वदेशी रक्षा तकनीक की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।

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