उद्धव ठाकरे को बड़ा राजनीतिक झटका, लोकसभा स्पीकर ने 6 बागी सांसदों के शिंदे गुट में विलय को दी मंजूरी

महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह बागी सांसदों के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ ही लोकसभा में शिंदे गुट की ताकत और बढ़ गई है।

Knews Desk- उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने पिछले महीने बगावत कर दी थी। 17 जून को इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र सौंपकर खुद को अलग समूह के रूप में मान्यता देने और शिंदे गुट में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। लगभग एक महीने बाद लोकसभा सचिवालय ने उनके विलय को औपचारिक स्वीकृति दे दी।

दलबदल कानून से क्यों नहीं गई सांसदों की सदस्यता?

संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत यदि किसी दल के कम से कम दो-तिहाई सांसद या विधायक एक साथ अलग होकर किसी अन्य दल में विलय करते हैं, तो उन पर दलबदल विरोधी कानून लागू नहीं होता। चूंकि उद्धव ठाकरे गुट के 9 में से 6 सांसद एक साथ अलग हुए, जो दो-तिहाई संख्या के बराबर है, इसलिए उनकी लोकसभा सदस्यता पर कोई खतरा नहीं आया।

बागी सांसदों ने उद्धव ठाकरे पर लगाए थे ये आरोप

स्पीकर को भेजे गए पत्र में बागी सांसदों ने दावा किया था कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है। उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता शिवसेना का कांग्रेस में विलय कराने की दिशा में काम कर रहे थे। सांसदों का कहना था कि शिवसेना की पहचान और अस्तित्व बचाने के लिए उन्होंने अलग रास्ता चुना।

लोकसभा में बढ़ी शिंदे गुट की ताकत

छह सांसदों के विलय के बाद लोकसभा में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। इसे महाराष्ट्र की राजनीति में शिंदे गुट के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।

‘ऑपरेशन टाइगर’ पर क्या बोले एकनाथ शिंदे?

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि उनके साथ जुड़ने वाले नेता किसी दबाव में नहीं, बल्कि भरोसे के कारण आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई जनप्रतिनिधि उनकी शिवसेना से जुड़े हैं क्योंकि उन्हें पार्टी के नेतृत्व और काम करने के तरीके पर विश्वास है। शिंदे ने यह भी कहा कि उनकी राजनीति लोगों को जोड़ने की है, तोड़ने की नहीं, और उनकी प्राथमिकता जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की जनता के लिए बेहतर काम करने का अवसर देना है।

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