Knews Desk– बिहार में एमबीबीएस की पढ़ाई का सपना देख रहे NEET 2026 अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने राज्य के कई सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। यह फैसला शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा, जिससे पहले की तुलना में अधिक छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही वैशाली के महुआ और भोजपुर के आरा में दो नए सरकारी मेडिकल कॉलेज भी शुरू होने जा रहे हैं। इस कदम से बिहार में मेडिकल शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी और डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले हजारों छात्रों को राहत मिलेगी।
राज्य के प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी सीटों का विस्तार किया गया है। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में एमबीबीएस सीटों की संख्या 200 से बढ़ाकर 250 कर दी गई है, यानी यहां 50 नई सीटें जोड़ी गई हैं। वहीं जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (JLNMCH), भागलपुर में सीटें 120 से बढ़ाकर 150 कर दी गई हैं। हालांकि, NMC ने इन संस्थानों को 90 दिनों के भीतर फैकल्टी और अन्य आवश्यक संसाधनों से जुड़ी कमियों को पूरा करने का निर्देश भी दिया है, ताकि छात्रों को बेहतर शिक्षा और प्रशिक्षण मिल सके।बिहार सरकार महुआ और आरा में दो नए सरकारी मेडिकल कॉलेज शुरू करने की तैयारी भी अंतिम चरण में है। दोनों कॉलेजों में 100-100 एमबीबीएस सीटों के साथ इसी शैक्षणिक सत्र से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। इसके अलावा दरभंगा मेडिकल कॉलेज, श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH), मुजफ्फरपुर और अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज, गया में भी सीटें बढ़ाने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इससे आने वाले समय में राज्य में सरकारी मेडिकल सीटों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
सरकारी कॉलेजों के साथ-साथ निजी मेडिकल कॉलेजों को भी बड़ी राहत मिली है। महाबोधि मेडिकल कॉलेज और खगड़िया के श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज को 100-100 एमबीबीएस सीटों की मंजूरी दी गई है। वहीं विराट रामायण इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज को 50 सीटों की स्वीकृति मिली है। कटिहार मेडिकल कॉलेज में अब 200 सीटों पर प्रवेश होगा, जबकि नारायण मेडिकल कॉलेज, सासाराम और मधुबनी मेडिकल कॉलेज में 250-250 सीटों पर दाखिला लिया जाएगा। इसके अलावा माता गुजरी मेडिकल कॉलेज, किशनगंज और लॉर्ड बुद्धा मेडिकल कॉलेज, सहरसा में अब 150-150 सीटों पर प्रवेश की व्यवस्था होगी।
एमबीबीएस सीटों में इस बड़े विस्तार से बिहार के छात्रों को राज्य से बाहर मेडिकल शिक्षा के लिए जाने की आवश्यकता कम होगी। साथ ही राज्य में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में भी यह फैसला महत्वपूर्ण साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में बिहार की स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी और स्थानीय छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे।