Knews Desk– प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव और उनके सहयोगियों के झांसी तथा लखनऊ स्थित कई ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले की जांच के तहत की गई। तलाशी अभियान के दौरान जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और संपत्तियों से संबंधित रिकॉर्ड जब्त किए हैं।
ED के अनुसार, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत दर्ज प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) के आधार पर की गई। यह ECIR उत्तर प्रदेश विजिलेंस एस्टेब्लिशमेंट द्वारा दर्ज उस FIR पर आधारित है, जिसमें पूर्व विधायक पर अपनी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाए गए हैं।
जांच एजेंसी ने पूर्व विधायक, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों व अन्य संबंधित व्यक्तियों के आवासीय और व्यावसायिक परिसरों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। ED का उद्देश्य कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों, वित्तीय लेनदेन, लाभकारी स्वामित्व और अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों के संबंध में साक्ष्य जुटाना है।
छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने वित्तीय दस्तावेजों के अलावा कई डिजिटल डिवाइस और चल-अचल संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड भी अपने कब्जे में लिए हैं। एजेंसी का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के बाद कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और अवैध धन के निवेश का पता लगाया जाएगा।
प्रारंभिक जांच में ED को यह भी जानकारी मिली है कि दीप नारायण सिंह यादव ने रियल एस्टेट, निर्माण कार्य और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में लगी कंपनियों तथा लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) के नेटवर्क के माध्यम से कथित रूप से अवैध धन का निवेश और उसे वैध बनाने का प्रयास किया। एजेंसी अब इन कंपनियों और उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी विस्तार से जांच कर रही है।
दीप नारायण सिंह यादव झांसी जिले की गरौठा विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, उनके खिलाफ पहले से 23 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। वहीं, शुरुआती जांच में धोखाधड़ी, जालसाजी, जबरन वसूली, हत्या के प्रयास और डकैती समेत करीब 60 अपराधों का उल्लेख सामने आया है। ये मामले भारतीय दंड संहिता (IPC), उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एक्ट और गुंडा एक्ट सहित विभिन्न कानूनों के तहत दर्ज बताए गए हैं।
ED का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित अवैध कमाई को किन-किन संपत्तियों और व्यवसायों में लगाया गया तथा इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।