जुलाई में दो बार लगेगा पंचक काल, पहले ‘मृत्यु पंचक’ से शुरू होगा अशुभ समय, जानें तारीख और सावधानियां

KNEWS DESK- जुलाई 2026 में पंचक काल दो बार लगने वाला है, जिसमें पहला पंचक विशेष रूप से ‘मृत्यु पंचक’ माना जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसे सबसे अशुभ पंचक कालों में शामिल किया जाता है, जिसमें कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। यह अवधि 3 और 4 जुलाई की रात करीब 12 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर 8 जुलाई 2026 की शाम लगभग 4 बजे तक प्रभावी रहेगी।

पंचक की गणना को लेकर पारंपरिक मान्यता है कि जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करते हुए अंतिम पाँच नक्षत्रों—धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपदा, उत्तरा भाद्रपदा और रेवती—से गुजरता है, तो उस समय को पंचक काल कहा जाता है। इस दौरान विशेष रूप से सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

इस संबंध में पंचक की जानकारी और गणना आमतौर पर द्रिक पंचांग जैसे पंचांगों के आधार पर दी जाती है, जिनमें तिथियों और नक्षत्रों के अनुसार विस्तृत ज्योतिषीय विवरण उपलब्ध होते हैं।

शनिवार से शुरू होने के कारण ‘मृत्यु पंचक’ कहलाएगा यह काल

ज्योतिष शास्त्र में यह भी माना जाता है कि पंचक का स्वरूप सप्ताह के दिन पर निर्भर करता है। जैसे—

  • रविवार से शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है
  • सोमवार से राज पंचक
  • मंगलवार से अग्नि पंचक
  • शुक्रवार से चोर पंचक
  • शनिवार से मृत्यु पंचक

चूंकि जुलाई 2026 का पहला पंचक 4 जुलाई 2026, शनिवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इसे ‘मृत्यु पंचक’ कहा जाएगा। मान्यता है कि यह पंचक सबसे अधिक अशुभ प्रभाव वाला होता है।

मृत्यु पंचक में किन कार्यों से बचना चाहिए

ज्योतिष परंपराओं के अनुसार मृत्यु पंचक के दौरान कई कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इस अवधि में जोखिम और अनचाही घटनाओं की संभावना अधिक मानी जाती है।

इस दौरान विशेष रूप से—

  • कोई भी बड़ा जोखिम लेने वाला काम टालना चाहिए
  • संपत्ति खरीदना या किसी नए निवेश की शुरुआत नहीं करनी चाहिए
  • विवाह, सगाई, गृहप्रवेश या नए निर्माण कार्य की शुरुआत वर्जित मानी जाती है
  • लकड़ी का सामान, नया बिस्तर, ईंधन या घर से जुड़ी नई खरीदारी से बचना चाहिए

हालांकि यह मान्यताएँ ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित हैं, और इन्हें लोग अपनी आस्था व विश्वास के अनुसार अपनाते हैं।

जुलाई 2026 का पहला पंचक काल ‘मृत्यु पंचक’ होने के कारण विशेष रूप से संवेदनशील माना जा रहा है। ऐसे में परंपरागत मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में सावधानी बरतना और शुभ कार्यों को टालना ही उचित माना गया है।

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