Knews Desk– गुजरात के राजकोट नगर निगम (RMC) का अतिक्रमण हटाओ अभियान अब कार्रवाई से ज्यादा उसके खर्चों को लेकर चर्चा में है। जंगलेश्वर इलाके में चलाए गए डिमोलिशन ड्राइव के बाद नगर निगम के सामने 3 करोड़ रुपये से अधिक का बिल पेश किया गया, जिसे देखकर नए पॉलिटिकल बोर्ड और स्टैंडिंग कमेटी ने भुगतान पर तत्काल रोक लगा दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित कर दी गई है।
चाय, जलेबी और काजू कतली पर लाखों का खर्च
सबसे ज्यादा सवाल रिफ्रेशमेंट के बिल को लेकर उठ रहे हैं। दस्तावेजों के मुताबिक, केवल चाय-नाश्ते और मिठाइयों पर ही 27.2 लाख रुपये खर्च दिखाए गए हैं। बिल में 21,310 कप चाय, 13,390 स्पेशल लंच प्लेट, काजू कतली, जलेबी और खजूर रोल जैसी खाद्य सामग्री शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था अभियान में तैनात कर्मचारियों और मौके पर मौजूद करीब 190 मीडिया कर्मियों के लिए की गई थी।
पानी की बोतल के दाम ने बढ़ाया शक
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला मामला मिनरल वॉटर की खरीद का सामने आया। करीब 4,800 कर्मचारियों के लिए पानी की व्यवस्था के नाम पर 12.4 लाख रुपये का बिल बनाया गया। अधिकारियों के अनुसार, 200 मिलीलीटर की प्रत्येक पानी की बोतल नगर निगम को 8 रुपये में सप्लाई की गई, जबकि बाजार में इसी श्रेणी की बोतल थोक में 3 रुपये से कम और खुदरा में लगभग 5 रुपये में उपलब्ध होती है। इसी वजह से खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
टेंट, ड्रोन और वीडियोग्राफी भी जांच के घेरे में
केवल खान-पान ही नहीं, बल्कि अस्थायी टेंट और शेल्टर लगाने के लिए करीब 9.94 लाख रुपये का दावा किया गया है। इसके अलावा ऑपरेशन की वीडियोग्राफी, ड्रोन सर्विलांस और कैमरा सेवाओं पर लगभग 22 लाख रुपये खर्च दिखाया गया। स्टैंडिंग कमेटी अब यह भी जांच रही है कि इन सेवाओं की वास्तविक जरूरत क्या थी और बिल तय नियमों के अनुसार बनाए गए या नहीं।
SIT करेगी पूरे भुगतान और खरीद प्रक्रिया की जांच
नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी ने फिलहाल सभी बकाया भुगतान रोक दिए हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि अलग-अलग विभागों ने किन प्रक्रियाओं के तहत इन बिलों का भुगतान किया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, खान-पान का भुगतान फ्लावर एंड गार्डन विभाग ने, जबकि पानी और टेंट से जुड़े खर्चों का भुगतान कल्चरल विभाग ने किया था। अब SIT पूरे मामले का ऑडिट करेगी और यह पता लगाएगी कि खरीद, बिलिंग और मंजूरी की प्रक्रिया में कहीं वित्तीय अनियमितता या नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।