अयोध्या चंदा चोरी केस: पुलिस पूछताछ और रिमांड को लेकर आज अहम सुनवाई

Knews Desk- अयोध्या के बहुचर्चित राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सोमवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। इस केस में गिरफ्तार सभी 8 आरोपियों की पुलिस रिमांड आज खत्म हो रही है, जिसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस की ओर से एक बार फिर आरोपियों की रिमांड बढ़ाने की मांग किए जाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, इस मामले ने अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नया मोड़ ले लिया है।

इसी बीच, अयोध्या के वकीलों ने बड़ा फैसला लेते हुए आरोपियों का केस लड़ने से इनकार कर दिया है। फैजाबाद बार एसोसिएशन की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने पहले ही संकेत दिए थे कि इस मुद्दे पर अंतिम फैसला सोमवार को लिया जाएगा। वकीलों के इस कदम से मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।

पुलिस जांच के दौरान कल कई आरोपियों के घरों पर छापेमारी की गई थी। इस कार्रवाई में राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर से ज्वैलरी, नकदी और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए। इसके अलावा अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और रामाशंकर मिश्रा के पैतृक घरों पर भी तलाशी अभियान चलाया गया। पुलिस का दावा है कि जांच में कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं।

गौरतलब है कि इस मामले में पहली एफआईआर 25 जून को दर्ज की गई थी, जबकि चोरी की घटना की जानकारी 4 जून को ही सामने आ गई थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 5 जून तक लगभग 58 लाख रुपये की बरामदगी हो चुकी थी, और 8 जून तक यह राशि बढ़कर करीब 79.85 लाख रुपये तक पहुंच गई थी। इसके बावजूद एफआईआर दर्ज होने में लगभग 20 दिनों की देरी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

इस केस में कुल आठ लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है, जिनमें राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, रमाशंकर मिश्रा, मनीष यादव और करुणेश पांडे शामिल हैं।

इस बीच, मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए जांच की मांग की थी, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पलटवार करते हुए कहा कि अयोध्या को रामभक्तों ने संवारने का काम किया है और विपक्ष सिर्फ राजनीति कर रहा है।

अब जब सभी आरोपियों की रिमांड समाप्त हो रही है और अदालत में पेशी तय है, तो पुलिस द्वारा आगे की जांच और पूछताछ के लिए रिमांड बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है। वकीलों के बहिष्कार और राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

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