Knews Desk- लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक कोचिंग सेंटर अग्निकांड मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। इस हादसे में 15 मासूम बच्चों की मौत के बाद अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के सहायक अभियंता समेत 5 और इंजीनियरों एवं कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। इससे पहले भी दो अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। इस तरह अब तक कुल 7 अधिकारियों-कर्मचारियों पर गाज गिर चुकी है।
शासन द्वारा की गई इस ताजा कार्रवाई में सहायक अभियंता संजय शुक्ला, अधीक्षण अभियंता आनंद मिश्रा, अधिशासी अभियंता शिवेंद्र शुक्ला और अवर अभियंता हेमंत कुमार शामिल हैं। इनके अलावा सुपरवाइजर के रूप में तैनात बेलदार हरपाल को भी निलंबित किया गया है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई जांच में सामने आई गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं के आधार पर की गई है।
इससे पहले अवर अभियंता प्रमोद पांडे और सहायक अभियंता अनिल कुमार को भी निलंबित किया जा चुका है। एलडीए ने मामले की जांच के बाद कुल 18 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी थी। धीरे-धीरे प्रशासन उन सभी अधिकारियों पर कार्रवाई कर रहा है जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
हादसे के बाद अब उस बहुमंजिला इमारत पर भी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है, जहां यह कोचिंग सेंटर चल रहा था। प्रशासन ने इमारत के मालिक वीरेंद्र शुक्ला को ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी कर दिया है। बताया जा रहा है कि नोटिस उन्हें जेल में जाकर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह इमारत बिना उचित स्वीकृति और सुरक्षा मानकों के बनाई गई थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि इमारत में आपातकालीन निकासी मार्ग नहीं था, जिसके कारण आग लगने के बाद बच्चे बाहर नहीं निकल सके और यह बिल्डिंग उनके लिए एक “मौत का जाल” साबित हुई। अब प्रशासन ने इस अवैध निर्माण को पूरी तरह ध्वस्त करने का निर्णय लिया है और जल्द ही बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी। 22 जून को हुए इस दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। कोचिंग सेंटर में अचानक लगी आग और जहरीले धुएं के कारण 15 बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के बाद से ही प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लग रहे थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के शरीर पर जलने या बाहरी चोट के गहरे निशान नहीं मिले हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कमरे में तेजी से फैले जहरीले धुएं के कारण बच्चों का दम घुट गया, जिससे उनकी मौत हुई। धुएं के प्रभाव से कई बच्चों के चेहरे और आंखों में सूजन भी देखी गई। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है और जिम्मेदारों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाने की बात कही जा रही है।