राम मंदिर चंदा विवाद में सबसे बड़ा धमाका, महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा

डिजिटल डेस्क- अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के कथित आरोपों के बीच शुक्रवार को देश का सबसे बड़ा और सनसनीखेज राजनीतिक-धार्मिक घटनाक्रम सामने आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ ही ट्रस्ट के एक और बेहद प्रभावशाली सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने भी अपना पद छोड़ दिया है। इन दोनों बड़े चेहरों के इस्तीफे के बाद अयोध्या से लेकर लखनऊ और दिल्ली के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।

SIT की कड़क कार्रवाई और विपक्ष के भारी दबाव के बाद लिया फैसला

सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय और अनिल मिश्रा पर पिछले कुछ दिनों से पद छोड़ने का भारी नैतिक और राजनीतिक दबाव था। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद से ही विपक्षी दल लगातार ट्रस्ट के प्रबंधन और पारदर्शिता पर हमलावर थे। यह इस्तीफा ठीक ऐसे समय पर आया है, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर पहली एफआईआर (FIR) दर्ज हो चुकी है और एसआईटी ने चंपत राय के निजी वाहन चालक (ड्राइवर) समेत सभी 8 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच की आंच खुद तक पहुंचती देख और ट्रस्ट की छवि को बचाने के लिए दोनों ने पद से हटने का निर्णय लिया।

शुक्रवार को हुआ अयोध्या का सबसे बड़ा उलटफेर, जांच तेज

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े इस कथित चढ़ावा महाघोटाले के बीच शुक्रवार को हुए इस इस्तीफे ने पूरे देश को चौंका दिया है। बताया जा रहा है कि एसआईटी की कड़ाई और शासन के सख्त रुख को देखते हुए ट्रस्ट के भीतर भी आंतरिक कलह और असंतोष बढ़ रहा था। चंपत राय लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन और फिर मंदिर निर्माण प्रक्रिया के सबसे मुख्य सूत्रधार रहे हैं, ऐसे में उनका पद छोड़ना इस पूरे विवाद की गंभीरता को बयां करता है। अब इन दोनों बड़े प्रभारियों के इस्तीफे के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बहुत जल्द बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे, वहीं एसआईटी भी अब नए सिरे से वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड्स को खंगालने में जुट गई है।

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