Knews Desk- भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार पुलिस पर लगातार सवाल उठने के बाद अब जांच और कार्रवाई के स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पिछले 36 घंटों में इस केस से जुड़े तीन अहम फैसलों ने पूरे मामले की दिशा बदल दी है, जिसके बाद पुलिस और सरकार पर दबाव कम करने की कोशिशों को भी लेकर चर्चा तेज हो गई है।
मामला 17 जून का है, जब शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के रहने वाले भरत भूषण तिवारी का पुलिस एनकाउंटर हुआ था, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पहले उसे हिरासत में लिया और बाद में गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद से ही इलाके में तनाव और राजनीतिक हलचल बढ़ गई। लगातार बढ़ते विवाद के बीच अब बिहार पुलिस ने तीन बड़े फैसले लिए हैं। पहला, परिजनों की शिकायत के आधार पर भोजपुर के एसडीपीओ और एसएचओ के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। दोनों अधिकारियों के खिलाफ जांच भी शुरू कर दी गई है। यह कदम घटना के कई दिनों बाद लिया गया है, जिससे मामले में नया मोड़ आ गया है।
दूसरा बड़ा फैसला प्रशासनिक स्तर पर लिया गया, जिसमें भोजपुर के एसडीपीओ का तबादला कर दिया गया है। उन्हें फिलहाल पुलिस मुख्यालय में अटैच किया गया है। इस कदम को एनकाउंटर विवाद के बाद उठाए गए सबसे अहम प्रशासनिक बदलावों में से एक माना जा रहा है। तीसरा फैसला पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें भरत तिवारी के भाई और पिता के खिलाफ दर्ज केस को वापस ले लिया गया है। पहले उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने कथित तौर पर अवैध हथियार को छिपाने या संरक्षित करने में भूमिका निभाई थी, लेकिन अब उनका नाम मामले से हटा दिया गया है।
इस पूरे मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब एक वीडियो सामने आया, जिसमें भरत तिवारी को कथित रूप से हथियार फेंकते हुए देखा गया था। इसके बाद हुए एनकाउंटर और मौत ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला गरमा गया है। विपक्षी दलों के साथ-साथ कई सामाजिक संगठनों ने एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग की है। दबाव बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच एक रिटायर्ड हाईकोर्ट जज को सौंप दी है।
फिलहाल, जांच जारी है और पुलिस के इन तीन बड़े यू-टर्न को मामले में बढ़ते जनदबाव और राजनीतिक प्रतिक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेगी।